शिमला। CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज हिमाचल प्रदेश का बहुप्रतीक्षित बजट पेश करने जा रहे हैं, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। आर्थिक दबाव, घटते राजस्व और बढ़ते खर्च के बीच पेश होने वाला यह बजट न केवल सरकार की नीतिगत दिशा तय करेगा- बल्कि आम लोगों की उम्मीदों और चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी परीक्षा भी होगा।
राज्य के इतिहास में यह बजट कई मायनों में अलग और अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब केंद्र से मिलने वाली RDG बंद हो चुकी है। इसका सीधा असर प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है और सरकार के सामने सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक राहत देने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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कर्मचारियों को राहत की उम्मीदें
प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी लंबे समय से महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में इस बजट से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि सरकार आंशिक राहत या चरणबद्ध तरीके से फैसले ले सकती है।
युवाओं को रोजगार की उम्मीद
वहीं, युवा वर्ग की नजरें रोजगार सृजन पर टिकी हैं। बेरोजगारी का मुद्दा प्रदेश में लगातार चर्चा में रहा है, ऐसे में सरकार से नई भर्तियों, स्किल डेवलपमेंट योजनाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।
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हो सकती है बिजली फ्री
चुनावी वादों में शामिल 300 यूनिट मुफ्त बिजली का मुद्दा भी इस बजट में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रदेश की महिलाओं को लेकर भी सरकार कुछ नई योजनाओं या आर्थिक सहायता से जुड़ी घोषणाएं कर सकती है।
बजट से बड़ी उम्मीदें
इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, पंचायत चौकीदारों और अन्य मानदेय पर काम करने वाले वर्गों को इस बार बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इन वर्गों को सरकार राहत दे सकती है।
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किसानों-बागवानों के लिए राहत की आस
हाल के दिनों में खराब मौसम, बारिश और बर्फबारी से प्रभावित किसानों और बागवानों को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। सरकार उनकी आय बढ़ाने, फसल सुरक्षा, बागवानी को प्रोत्साहन और प्राकृतिक आपदाओं से राहत देने के लिए नई योजनाओं का ऐलान कर सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी इस बजट का अहम फोकस रह सकता है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर नजर
पिछले बजट में सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़े लाभार्थियों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई थी, जिससे निराशा देखने को मिली थी। इस बार सरकार इस वर्ग को साधने की कोशिश कर सकती है और पेंशन राशि बढ़ाने या पात्रता में बदलाव जैसे फैसले ले सकती है।
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अमीर वर्ग पर सख्ती के संकेत
एक तरफ जहां कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को राहत देने की संभावना है, वहीं आर्थिक रूप से सक्षम वर्गों पर कुछ अतिरिक्त बोझ डाला जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट रैंक वापस लेने जैसे फैसलों से सरकार पहले ही सख्ती के संकेत दे चुकी है, जिससे यह साफ है कि वित्तीय संतुलन बनाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
बजट से पहले CM सुखविंद्र सुक्खू ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि आपदा के समय प्रदेश का साथ नहीं दिया गया। साथ ही RDG के मुद्दे पर भी केंद्र और विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए।
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आर्थिक चुनौतियां बनी बड़ी चिंता
हाल ही में पेश किए गए अनुपूरक बजट ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है। करीब 40,462 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च इस बात का संकेत है कि सरकार पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा सप्लीमेंटरी बजट माना जा रहा है।
RDG बंद होने से आई कमी
CM सुक्खू ने खुद स्वीकार किया है कि RDG बंद होने से राजस्व में कमी आई है और इसकी भरपाई करना आसान नहीं है। ऐसे में यह बजट सरकार के लिए संतुलन साधने का प्रयास होगा-जहां एक ओर राहत देनी है, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन भी बनाए रखना है।
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क्या होगा खास?
इस बार का बजट कई सवालों के जवाब देगा-
- क्या कर्मचारियों को DA मिलेगा?
- क्या युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे?
- क्या किसानों-बागवानों को राहत मिलेगी?
- क्या 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा होगा?
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कई सवालों के मिलेग बजट
इन सभी सवालों के जवाब आज विधानसभा में पेश होने वाले बजट के साथ सामने आएंगे। साफ है कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि हिमाचल के आर्थिक भविष्य और राजनीतिक दिशा को तय करने वाला महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
