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May 2, 2026

हिमाचल निकाय चुनाव: 'अपनों' के मोह में फंसी कांग्रेस, अनुभव को दरकिनार कर मंत्री के भतीजे को दिया टिकट

कांग्रेस ने चार बार की पार्षद का टिकट काट मंत्री के भतीजे को मैदान में उतारा

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himachal mandi congress

मंडी। हिमाचल प्रदेश में निकाय चुनावों से पहले ही सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मैदान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन उससे पहले टिकट आवंटन को लेकर ही पार्टियों के भीतर खींचतान और अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। ताजा मामला मंडी नगर निगम के खलियार वार्ड का है, जहां कांग्रेस के भीतर चली लंबी रस्साकशी ने राजनीति के कई रंग दिखा दिए। यहां कांग्रेस ने अनुभव की लंबी पारी को रसूख के आगे कुर्बान कर दिया है।

अनुभव की अनदेखी या परिवारवाद का प्रभाव

खलियार वार्ड से कांग्रेस ने आखिरकार अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, लेकिन यह फैसला आसान नहीं था। कई दिनों तक चले सस्पेंस, गुटबाजी और सियासी दबाव के बाद पार्टी ने पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के भतीजे प्रवीण कुमार ठाकुर को मैदान में उतार दिया। इस फैसले के साथ ही चार बार की पार्षद और कांग्रेस प्रवक्ता अलकनंदा हांडा का टिकट कट गया जो पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।

 

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शिमला से दिल्ली तक चला सियासी संग्राम

सूत्रों के मुताबिक टिकट के लिए दोनों पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मामला सिर्फ मंडी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिमला से लेकर दिल्ली तक सिफारिशों और दबाव की राजनीति चलती रही। आखिरकार नामांकन के अंतिम दिन समीकरण बदले और कौल सिंह ठाकुर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने भतीजे को टिकट दिलाने में सफल रहे। यह फैसला कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व के प्रभाव को भी उजागर करता है।

 

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अनुभव बनाम नई राजनीति

अलकनंदा हांडा लंबे समय से वार्ड की मजबूत नेता रही हैं और चार बार पार्षद रह चुकी हैं। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर नया चेहरा उतारा है। पार्टी इसे नए नेतृत्व को मौका, देने का फैसला बता रही है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह साफ तौर पर गुटबाजी और अंदरूनी दबाव का नतीजा है।

बगावत पर उतरी अलकनंदा हांडा

प्रवीण कुमार को टिकट देने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता बगावत पर उतर आई है और उन्होंने आजाद नामांकन दाखिल किया है। टिकट कटने के बाद अलकनंदा हांडा ने कहा कि महिला होने की वजह  से पार्टी ने मेरा टिकट काट दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी जीत की प्रबल संभावनाएं थीं और मैं जीतकर दिखाऊंगी। उन्होंने कहा कि हाईकमान से टिकट उन्होंने मांगा था, लेकिन टिकट नहीं दिया गया।

चुनाव बना प्रतिष्ठा की जंग

खलियार वार्ड इस बार खासा अहम माना जा रहा है। वार्ड के पुनर्गठन के बाद इसमें बिजणी क्षेत्र को शामिल किया गया है, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इसी क्षेत्र से जुड़े चेहरों पर दांव खेला है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

 

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अब असली चुनौती मैदान में

प्रवीण कुमार ठाकुर के पास कानून के क्षेत्र में लंबा अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका रही है, लेकिन अब उनके सामने असली चुनौती चुनाव जीतने की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वे अपने ताया कौल सिंह ठाकुर के राजनीतिक कद के अनुरूप जनता का विश्वास जीत पाएंगे, या फिर नाराज कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी कांग्रेस की राह मुश्किल करेगी। फिलहाल, खलियार वार्ड का यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और सियासी वर्चस्व की परीक्षा बन चुका है।

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