#राजनीति
May 4, 2026
हिमाचल की इस नगर पंचायत का बड़ा फैसला: अपने नामांकन वापस लेंगे सभी प्रत्याशी, जानें वजह
ग्रामीणों ने बैठक कर लिया बड़ा फैसला, सुक्खू सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा
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करसोग (मंडी)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव का बिगुल बजते ही अब कई जगह लोगों का विरोध भी दिखने लगा है। कहीं पंचायतों के पुनर्गठन तो कहीं अन्य कारणों से लोग पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान करने लगे हैं। इस सब के बीच अब हिमाचल के मंडी जिला से एक बड़ी खबर सामने आई है। नगर पंचायत करसोग के की जनता ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी नामांकन वापस लेने का फैसला लिया है।
दरअसल हिमाचल प्रदेश के करसोग में नगर पंचायत चुनावों को लेकर एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। करसोग की जनता ने प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए सामूहिक रूप से चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
रविवार देर शाम पुराने बाजार में आयोजित एक बड़ी जनसभा में नगर पंचायत के सभी सात वार्डों से आए लोगों ने एकमत से निर्णय लिया कि चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं लिया जाएगा और जिन उम्मीदवारों ने नामांकन भरे हैं, वे सभी अपने पर्चे वापस लेंगे।
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बैठक की सबसे अहम बात यह रही कि इसमें न केवल आम लोग, बल्कि अधिकांश उम्मीदवार भी मौजूद रहे। सभी ने मीडिया के सामने खुलकर कहा कि वे जनता के फैसले के साथ हैं और अपने नामांकन वापस लेंगे। जो उम्मीदवार बैठक में नहीं पहुंच सके, उन्होंने भी सहमति जताई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नगर पंचायत क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के टैक्स लगाए गए, लेकिन उसके मुकाबले विकास कार्य नाममात्र ही हुए। इसी असंतोष ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। लोगों का साफ कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वे चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।
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नगर पंचायत के सात वार्डों में से वार्ड नंबर 7 (बरल) से पहले ही चुनाव बहिष्कार का संकेत मिल चुका था, जहां से एक भी नामांकन दाखिल नहीं किया गया। वहीं वार्ड नंबर 1 में केवल एक ही उम्मीदवार ने पर्चा भरा था। अब पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में यह बहिष्कार एक सामूहिक निर्णय बन गया है।
जन एकता संघर्ष समिति से जुड़े स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि अब लोग नगर पंचायत व्यवस्था को खत्म कर पुरानी पंचायत प्रणाली बहाल करने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही।
फिलहाल करसोग की सियासत एक अजीब मोड़ पर खड़ी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नामांकन वापसी के दिन क्या सभी उम्मीदवार अपने पर्चे वापस लेते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा संदेश देने वाला घटनाक्रम साबित हो सकता है। करसोग का यह फैसला न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे हिमाचल की राजनीति में हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकार के खिलाफ जनता के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।