#राजनीति
May 2, 2026
हिमाचल 17 दिन बाद जेल से बाहर आए विधायक के भाई और चाचा, अवैध खनन मामले में मिली जमानत
अवैध खनन मामले में विधायक आशीष शर्मा के चाचा और भाई को मिली जमानत
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बीते कई दिनों से चर्चा का केंद्र बने अवैध खनन मामले में हमीरपुर सदर के भाजपा विधायक आशीष शर्मा के परिवार के लिए शनिवार का दिन राहत भरी खबर लेकर आया। करीब 17 दिनों तक सलाखों के पीछे रहने के बाद विधायक के भाई उमेश शर्मा और चाचा प्रवीण शर्मा को आखिरकार सेशन जज हमीरपुर की अदालत से नियमित जमानत मिल गई है। यह मामला अब सिर्फ कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासी रंग भी पकड़ चुका है। जमानत मिलने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोपण्प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
दरअसल यह मामला 13 अगस्त 2025 का है, जब सुजानपुर थाना क्षेत्र के पुंघ खड्ड में स्थित एक बंद स्टोन क्रशर पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में कथित तौर पर पत्थर, बजरी और मशीनरी बरामद कर कब्जे में ली गई थी। इसके बाद पुलिस ने विधायक के भाई और चाचा सहित कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया। मामले में पहले दोनों ने अग्रिम जमानत की कोशिश की, लेकिन राहत नहीं मिली। कोर्ट के निर्देश के बाद उन्होंने 15 अप्रैल को आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें पुलिस रिमांड और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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करीब ढाई हफ्ते जेल में बिताने के बाद अब सेशन कोर्ट से दोनों को नियमित जमानत मिल गई है। इससे उनके परिवार और समर्थकों ने राहत की सांस ली है। जमानत मिलने के बाद विधायक आशीष शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और उसके इशारों पर काम कर रहे अधिकारी निर्दोष लोगों को निशाना बना रहे हैं।
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विधायक आशीष शर्मा ने रामचरितमानस की एक चौपाई के जरिए सरकार की मानसिकता पर कटाक्ष करते हुए कहा:-
"जाको प्रभु दारुण दुख देहीं, ताकी मति पहिले हर लेहीं।"
आशीष शर्मा ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार और उसके एजेंट की तरह काम कर रहे अधिकारी अपनी बर्बादी के दिन गिन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार सत्ता के नशे में अंधी होकर निर्दोष लोगों पर झूठे केस दर्ज कर रही है और जनता को प्रताड़ित कर रही है। अधिकारियों और नेताओं के ये काले कारनामे ही उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत बर्बादी का कारण बनेंगे।
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इस पूरे घटनाक्रम के बाद हमीरपुर की राजनीति गरमा गई है। भाजपा इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से अब तक इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल, कानूनी प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह मामला आने वाले समय में और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।
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विधायक के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा शांत नहीं होने वाला है। भाजपा इसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग बताकर भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं विधायक ने चेतावनी दी है कि न्यायपालिका ने न्याय किया है और जनता इस जुल्म का हिसाब जरूर लेगी।