शिमला/नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की पूरी की पूरी सुक्खू सरकार आज आउट ऑफ स्टेशन है। यानी हिमाचल में कांग्रेस सरकार का कोई भी नुमाइंदा आपको हिमाचल में नहीं मिलेगा। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली पहुंच गए हैंए जबकि प्रदेश के सभी कांग्रेस विधायकों ने भी राजधानी में डेरा डाल दिया है। 

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी में हिमाचल कांग्रेस अब INDIA गठबंधन के उस विरोध में शामिल होंगे। जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाए जाएंगे। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का यह मार्च सुप्रीम कोर्ट तक निकाला जाना प्रस्तावित है।

पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली पहुंचे सीएम सुक्खू

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के मुखिया सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार को दिल्ली पहुंचे। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, कैबिनेट मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित प्रदेश कांग्रेस के विधायक भी दिल्ली में मौजूद हैं। मंत्रियों और विधायकों की एकजुट मौजूदगी को विपक्ष के राष्ट्रीय स्तर के अभियान में हिमाचल कांग्रेस की सक्रिय भागीदारी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर अपनी आवाज बुलंद करना है।

 

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सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में दिखेगी हिमाचल कांग्रेस की ताकत

INDIA गठबंधन के घटक दलों ने सोमवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने का कार्यक्रम बनाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में प्रस्तावित इस मार्च में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सभी मंत्री और विधायक भी शामिल होंगे। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की बड़ी मौजूदगी से इस विरोध प्रदर्शन में हिमाचल की भागीदारी प्रमुख रहने की उम्मीद है। विपक्ष इस मार्च के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहता है।

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मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष मुखर

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी इन मुद्दों को लोकतंत्र, मतदाताओं के अधिकार और निष्पक्ष चुनाव से जोड़कर देख रही है। हालांकि, चुनावी अनियमितताओं को लेकर लगाए गए ये आरोप विपक्ष का पक्ष हैं और इन्हें अपने आप में प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

 

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SIR प्रक्रिया को लेकर क्या हैं विपक्ष के सवाल?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जाता है और आवश्यकतानुसार मतदाता सूची में संशोधन किए जाते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की चिंता है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर नहीं होना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और प्रत्येक योग्य नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

चुनाव आयोग की जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर

विपक्षी गठबंधन की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और कथित वोट चोरी के आरोपों पर कार्रवाई की मांग शामिल है। कांग्रेस चुनाव आयोग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है। पार्टी का तर्क है कि चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर स्पष्टता जरूरी है। इन मांगों और आरोपों पर संबंधित पक्षों का रुख भी इस राजनीतिक घटनाक्रम का अहम हिस्सा रहेगा।

 

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राहुल गांधी और खड़गे के नेतृत्व में जुटेंगे विपक्षी नेता

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मार्च सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड के जंक्शन से शुरू होना प्रस्तावित है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेता इस अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को आगे बढ़ाएंगे। विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय भी मांगा था, ताकि उन्हें ज्ञापन सौंपा जा सके। हालांकि, मुलाकात और मार्च के आगे के कार्यक्रम को लेकर अंतिम स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

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राष्ट्रीय मुद्दे पर हिमाचल कांग्रेस का एकजुट रुख

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों तक की दिल्ली में मौजूदगी इस विरोध प्रदर्शन को प्रदेश कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है। पार्टी के नेता INDIA गठबंधन के अन्य घटक दलों के साथ मिलकर SIR प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष के इस मार्च के दौरान क्या संदेश सामने आता है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे किस तरह की राजनीतिक या संस्थागत कार्रवाई की मांग की जाती है।

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