शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में 'सत्ता के केंद्र' को साधने की बिसात बिछ चुकी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्यसभा टिकट के जरिए कांगड़ा को तरजीह देकर जहां एक बड़ा सियासी दांव खेला है, वहीं अब उनकी नजर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र मंडी संसदीय क्षेत्र पर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि कैबिनेट विस्तार के जरिए सुक्खू सरकार मंडी में भाजपा के अभेद्य किले को ढहाने के लिए एक नया 'मोहरा' उतारने जा रही है।

अनुराग शर्मा को राज्यसभा भेजकर कांगड़ा को साधा

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कांगड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया। लंबे समय से चल रही उन अटकलों पर भी विराम लग गया जिसमें किसी मौजूदा मंत्री को दिल्ली भेजने की बात कही जा रही थी। कांगड़ा को यह अधिमान देकर सुक्खू ने राज्य के सबसे बड़े जिले में अपनी पकड़ मजबूत की है। अब इस मास्टरस्ट्रोक के बाद बारी 'मंडी' की है।

 

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जयराम ठाकुर के गढ़ मंडी में सियासी संतुलन की रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांगड़ा के बाद अब मुख्यमंत्री की नजर मंडी संसदीय क्षेत्र पर है, जो प्रदेश की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का राजनीतिक गढ़ भी रहा है। ऐसे में सुक्खू सरकार अगर मंडी से किसी नेता को मंत्री बनाती है तो इसे सीधे तौर पर जयराम ठाकुर के क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति के रूप में देखा जाएगा।

सुंदर सिंह ठाकुर की दावेदारी सबसे मजबूत

कैबिनेट में खाली पड़े मंत्री पद के लिए कुल्लू सदर से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। संगठन में उनकी सक्रियता और मंडी संसदीय क्षेत्र में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। इससे पहले उन्हें सुक्खू सरकार में मुख्य संसदीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा था। अब उन्हें मंत्री बनाकर सरकार राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।

 

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मंडी संसदीय क्षेत्र का बड़ा सियासी महत्व

मंडी संसदीय क्षेत्र प्रदेश की राजनीति में खास महत्व रखता है। इस क्षेत्र के तहत 17 विधानसभा सीटें आती हैं। वर्तमान में इनमें से केवल पांच सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि 12 सीटों पर भाजपा का दबदबा है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व मंडी में संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक पकड़ बढ़ाने के लिए मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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राज्यसभा के बाद कैबिनेट विस्तार की तैयारी

पिछले कुछ समय से यह चर्चा भी चल रही थी कि सुक्खू सरकार के किसी मौजूदा मंत्री को राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन कांगड़ा से अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव की तस्वीर साफ होने के बाद सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल के खाली पद को भर सकती है।

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क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश

गौरतलब है कि पिछली सरकारों में मंडी संसदीय क्षेत्र को आमतौर पर तीन से चार मंत्री पद मिलते रहे हैं, जबकि मौजूदा सुक्खू सरकार में फिलहाल इस क्षेत्र से केवल किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ही मंत्री हैं। ऐसे में अगर मंडी संसदीय क्षेत्र से किसी नेता को मंत्री बनाया जाता है तो इसे क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जाएगा।

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