शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक ओर सरकार खुद प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जाहिर कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी खजाने से विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। विधानसभा के बजट सत्र में सामने आए आंकड़ों ने इस विरोधाभास को उजागर कर दिया है। खुलासा हुआ है कि सुक्खू सरकार ने अपने करीब तीन साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर ही करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, जिससे विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है।

वित्तीय संकट के बीच करोड़ों का प्रचार खर्च

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कई मंचों से यह कह चुके हैं कि हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है और प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद सरकारी विभागों द्वारा प्रचार.प्रसार पर भारी खर्च किए जाने से सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्राथमिकताएं सही तय की जा रही हैं या नहीं।

 

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विधानसभा में खुला खर्च का पूरा लेखा-जोखा

धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने सदन में जो आंकड़े रखे, उनके अनुसार 31 अक्टूबर 2025 तक के तीन वर्षों में विभिन्न विभागों और बोर्डों ने विज्ञापनों पर कुल 22,87,74,109 (22.87) करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह राशि ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार खुद संसाधनों की कमी का हवाला देती रही है।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग सबसे आगे

आंकड़ों के अनुसार विज्ञापन खर्च में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग सबसे आगे रहा है। इस विभाग ने अकेले लगभग 14.73 करोड़ रुपये खर्च किएए जो कुल खर्च का बड़ा हिस्सा है। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन से ज्यादा उनके प्रचार पर ध्यान दे रही है।

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  • परिवहन विभाग: 3.05 करोड़ रुपये।
  • उद्योग विभाग: 1.24 करोड़ रुपये।
  • कृषि एवं बागवानी विभाग: लगभग 77 लाख रुपये।
  • इसके अलावा अन्य विभागों ने भी अपनी.अपनी क्षमता के अनुसार इस मद में खर्च किया है।

कर्ज में डूबे प्रदेश पर बढ़ता बोझ

प्रदेश पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और ऐसे में विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च करना विपक्ष के निशाने पर आ गया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह पैसा जनहित की योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों में नहीं लगाया जा सकता था।

 

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सरकार ने दी सफाई, पूर्व सरकार से तुलना

मामले पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में सफाई देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने विज्ञापनों पर पिछली भाजपा सरकार की तुलना में कम खर्च किया है। सीएम ने बताया कि पूर्व की भाजपा सरकार ने विज्ञापनों पर 28 करोड़ का बजट खर्च किया था। पूर्व की भाजपा सरकार ने होर्डिंग पर 6.36 करोड़ खर्च किए थे, जबकि हमारी सरकार ने केवल 2.40 करोड़ का बजट खर्च किया है। इसी तरह से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित अन्य प्रचार प्रसार पर भी पूर्व सरकार से कम राशि खर्च की गई है।

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