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May 9, 2026

हिमाचल चुनाव: बागियों पर भाजपा की बड़ी कार्रवाई, 6 दिग्गज नेताओं को किया पार्टी से निष्कासित

डॉ राजीव बिंदल ने छह नेताओं को निष्कासित किया, कहा अनुशासन के साथ कोई समझौता नहीं

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Himachal BJP Action

शिमला। हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय और पंचायत चुनावों की रणभेरी बजते ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां सत्तासीन कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा जीत दर्ज करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं] वहीं दूसरी ओर दोनों ही पार्टियों के लिए बागी नेता सबसे बड़ी सिरदर्द बन गए हैं।

 

चुनावी रण को जीतने के लिए बिछाई गई बिसात के बीच अब हिमाचल भाजपा ने अनुशासन का डंडा चलाते हुए सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ ताल ठोकने वाले 6 बड़े नेताओं को भाजपा ने तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

साख बचाने की जंग में अपनों ने फेरा पानी

हिमाचल में निकाय चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है] लेकिन पार्टी के भीतर पनपी बगावत ने रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी थी। कई वार्डों में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के सामने भाजपा के ही पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता बतौर आजाद उम्मीदवार मैदान में उतर गए थे।

 

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इस अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए कड़ा एक्शन लिया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन की मर्यादा से ऊपर कोई नहीं है और जो लक्ष्मण रेखा लांघने की कोशिश करेगा] उसका स्थान पार्टी में नहीं होगा।

धर्मशाला और नाहन के इन दिग्गजों पर गिरी गाज

पार्टी द्वारा जारी फरमान के अनुसार, धर्मशाला नगर निगम में बगावत करने वाले पूर्व मेयर और डिप्टी मेयर सहित कई पदाधिकारियों की प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी गई है। धर्मशाला के वार्ड नंबर 2 से पूर्व मेयर ओंकार नेहरिया, वार्ड नंबर 6 से पूर्व डिप्टी मेयर तेजेंद्र कौर, वार्ड नंबर 8 से मंडल सचिव सरोज गुलेरिया, वार्ड नंबर 14 से बूथ अध्यक्ष मितुल शुक्ला और वार्ड नंबर 1 से महिला मोर्चा की मंडल सचिव हिमांशी अग्रवाल पर निष्कासन की गाज गिरी है। वहीं, नाहन नगर परिषद के वार्ड नंबर 3 से लीला सैनी को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया है।

 

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अनुशासन के साथ कोई समझौता नहीं

भाजपा ने इस कार्रवाई के जरिए पूरे प्रदेश में यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा एक कार्यकर्ता आधारित संगठन है और यहां संगठनात्मक निर्णयों को चुनौती देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश नेतृत्व ने साफ कहा है कि अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ काम करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। डॉ. राजीव बिंदल ने सख्त शब्दों में कहा कि आगामी पंचायतीराज एवं नगर निकाय चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करना हर कार्यकर्ता का धर्म है और इसके लिए एकजुटता अनिवार्य है।

 

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बागियों के कारण बढ़ी कांग्रेस-भाजपा की धड़कनें

हिमाचल की राजनीति में इस समय जो मंजर दिख रहा है, वह बेहद दिलचस्प है। एक तरफ कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है, तो वहीं भाजपा ने कार्रवाई का रास्ता चुनकर बागियों को शांत करने की रणनीति अपनाई है। इन निष्कासनों के बाद अब देखना यह होगा कि क्या ये बागी चुनावी नतीजों पर कोई बड़ा असर डालते हैं या फिर पार्टी का यह कड़ा फैसला मतदाताओं के बीच एक नई एकजुटता लाने में सफल रहता है। फिलहाल, भाजपा के इस 'एक्शन' ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

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