#राजनीति
March 30, 2026
नया पद मिलते ही नीरज भारती ने किया 'धमाका', आभार संदेश से CM का नाम गायब, वजह भी बताई
भारती ने विनय और डिप्टी सीएम का भी जताया आभार, सीएम की अनदेखी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक और अक्सर विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व विधायक नीरज भारती ने एक बार फिर सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (HPCC) में उपाध्यक्ष की नई जिम्मेदारी मिलते ही भारती ने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए जो धमाका किया है, उसने सत्ता और संगठन के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान को सरेआम कर दिया है।
सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के आदी नीरज भारती ने अपनी नियुक्ति के बाद आलाकमान का आभार तो जताया, लेकिन इस सूची से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और खुद अपने पिता व कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्र कुमार का नाम नदारद रखकर सबको चौंका दिया है।

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत शनिवार देर रात एआईसीसी ने नियुक्तियों की सूची जारी की थी। इस सूची में कांगड़ा के कद्दावर नेता चौधरी चंद्र कुमार के बेटे नीरज भारती को संगठन में उपाध्यक्ष पद का बड़ा जिम्मा सौंपा गया। रविवार को जब भारती ने अपनी इस नई पारी के लिए आभार व्यक्त किया, तो उनकी पोस्ट के मजमून ने सीधे तौर पर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर ले लिया।
नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल कर कई नेताओं का अभार व्यक्ति किया, लेकिन उनके इस आभार संदेश से प्रदेश के मुखिया का नाम ही गायब कर दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का तो विशेष आभार जताया, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू के नाम पर 'मौन' साध लिया। इतना ही नहीं, सियासी हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि उन्होंने अपने पिता का जिक्र तक करना जरूरी नहीं समझा।
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जब सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के समर्थकों ने इस अनदेखी पर सवाल उठाए, तो नीरज भारती ने अपनी चिर-परिचित शैली में पलटवार करते हुए एक और पोस्ट डाली, जिसने इस विवाद की आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में तर्क दिया कि उन्हें यह जिम्मेदारी सरकार ने नहीं, बल्कि संगठन ने दी है, इसलिए धन्यवाद भी वहीं का बनता है जहां से आदेश जारी हुए हैं।

भारती ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर सीधा तंज कसते हुए अतीत का एक पन्ना खोल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जब स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे और सुखविंदर सिंह सुक्खू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तब क्या उन्होंने राजा साहब का शुक्रिया अदा किया था? इस तर्क के जरिए भारती ने न केवल अपनी कार्रवाई को जायज ठहराया, बल्कि मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए।
नीरज भारती ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ अपने दशकों पुराने रिश्तों की दुहाई देते हुए कहा कि इस नियुक्ति को लेकर उनकी चर्चा अग्निहोत्री से हुई थी, न कि मुख्यमंत्री से। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि "झूठ बोलना और चापलूसी करना उनकी फितरत में नहीं है," और वह वही कहेंगे जो उन्हें सही लगेगा।
नीरज भारती के इस रुख ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर संभावित गुटबाजी और मतभेदों की अटकलों को हवा दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधना पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहा है, और ऐसे बयान इस खाई को और उजागर करते हैं।
हालांकि, भारती के समर्थक उनके इस रुख को ‘ईमानदार राजनीति’ का उदाहरण बता रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने परंपरा और सिद्धांतों के आधार पर ही अपना पक्ष रखा है। वहीं, विरोधी इसे राजनीतिक परिपक्वता की कमी और अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश करार दे रहे हैं।