शिमला। हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की सोच अब तेजी से बदलती नजर आ रही है। पंचायत चुनावों के नतीजों में इसकी साफ झलक देखने को मिली है। इस बार गांवों की जनता ने पारंपरिक राजनीति से हटकर युवाओं पर भरोसा जताया है। कई पंचायतों में बुजुर्ग नेताओं को पीछे छोड़ते हुए 22 से 25 साल के शिक्षित युवाओं ने प्रधान पद पर जीत दर्ज की है।
सबसे खास बात यह रही कि कई पंचायतों में युवा लड़कियों ने भी शानदार जीत हासिल कर पंचायतों की कमान अपने हाथों में ली है। इनमें छात्राएं] लॉ ग्रेजुएट] यूजीसी नेट अभ्यर्थी और उच्च शिक्षा प्राप्त युवतियां शामिल हैं] जो अब गांवों के विकास की जिम्मेदारी संभालेंगी।
गांवों में दिखी नई सोच की बयार
दूसरे चरण में प्रदेश की 1276 पंचायतों में मतदान हुआ था। मतगणना के बाद सामने आए परिणामों ने यह साफ संकेत दिया कि अब ग्रामीण मतदाता पढ़े-लिखे और ऊर्जावान नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई जगह ऐसे उम्मीदवार विजयी हुए हैं जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि युवा नेतृत्व गांवों में नई सोच, नई ऊर्जा और आधुनिक विकास की दिशा तय करेगा।
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22 साल की तारादेवी बनी प्रधान
शिमला जिले के ठियोग विकास खंड की नहौल पंचायत में 22 साल की तारादेवी निर्विरोध प्रधान चुनी गई हैं। 2004 में जन्मी तारा देवी अभी इग्नू शिमला से सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही हैं। तारा देवी की जीत पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि तारा देवी के परिवार से पहले कभी किसी ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन इस बार पंचायत में महिला सीट आरक्षित होने के बाद गांव वालों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आगे किया। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी तारादेवी के पिता का निधन हो चुका है। उनका कहना है कि वह गांव के हर घर तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझेंगी और योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य करवाएंगी।
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आंचल ने विकास के नाम पर जीता भरोसा
शिमला जिला के कोटखाई विकास खंड की चौगान पंचायत में 23 वर्षीय आंचल ने 160 वोटों से शानदार जीत दर्ज की है। आंचल ने संजौली कॉलेज से अंग्रेजी में मास्टर्स की पढ़ाई की है। उनके पिता बागवानी से जुड़े हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त आंचल छात्र राजनीति में भी सक्रिय रही हैं। पंचायत चुनाव में महिला सामान्य सीट आरक्षित होने पर गांव वालों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि नई पंचायत होने के कारण क्षेत्र में कई बुनियादी सुविधाओं की कमी है। पंचायत भवन, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य सुविधाएं और पक्के रास्ते तैयार करवाना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।
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कानून की पढ़ाई कर रहीं ऋचा बनीं प्रधान
ठियोग क्षेत्र की शड़ी जोधपुर पंचायत में 24 वर्षीय ऋचा शर्मा ने प्रधान पद पर जीत दर्ज कर युवाओं के बढ़ते प्रभाव को और मजबूत किया है। ऋचा शर्मा ने त्रिकोणीय मुकाबले में 108 वोटों से जीत दर्ज की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी कर चुकी ऋचा इन दिनों न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। ऋचा बताती हैं कि उन्हें आठवीं कक्षा से राजनीति में रुचि थी। अब उन्होंने पंचायत क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने, खराब सड़कों के सुधार और महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने की बात कही है।
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यूजीसी नेट की तैयारी कर रहीं पाखी को भी मिला जनसमर्थन
चौपाल क्षेत्र की लिंगजार पंचायत में 25 वर्षीय पाखी शर्मा प्रधान चुनी गई हैं। उन्होंने 54 वोटों से जीत दर्ज की। राजनीति विज्ञान में मास्टर्स कर चुकी पाखी इन दिनों यूजीसी नेट परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। ग्रामीणों ने उन पर भरोसा जताते हुए पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी है। पाखी का कहना है कि गांवों की छोटी.छोटी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाई जाएगी। खराब रास्तों और विकास कार्यों पर भी वे विशेष ध्यान देना चाहती हैं।
युवा सोच के साथ मैदान में उतरे इंद्र सिंह
रामपुर ब्लॉक की सरपारा पंचायत में 23 वर्षीय इंद्र सिंह ने जीत हासिल कर सबका ध्यान खींचा। अंग्रेजी विषय में एमए कर चुके इंद्र सिंह ने पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा और लोगों ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया। उन्होंने पंचायत में सड़क सुविधाओं को मजबूत करने, सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था सुधारने और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
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युवा नेतृत्व से बढ़ी विकास की उम्मीदें
पंचायत चुनाव के इन परिणामों ने साफ कर दिया है कि हिमाचल के गांव अब बदलाव चाहते हैं। ग्रामीण मतदाता अब अनुभव के साथ-साथ शिक्षा, नई सोच और सक्रिय नेतृत्व को भी महत्व दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत स्तर पर युवाओं की यह बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति की दिशा भी बदल सकती है।
