शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दृष्टिबाधितों का आंदोलन अब और तेज होता नजर आ रहा है। सोमवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे दृष्टिबाधित जन संगठन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री आवास ‘ओक’ की ओर कूच कर घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण भी हो गया।
प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय के पास से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के चलते पुलिस ने उन्हें ओक ओवर से पहले ही बैरिकेड लगाकर रोक लिया, जिससे वे आगे नहीं बढ़ सके।
एसडीएम से बातचीत से किया इंकार
प्रदर्शन के दौरान एक दिलचस्प और विवादित स्थिति तब बनी, जब मौके पर पहुंचीं शहरी क्षेत्र की एसडीएम ओशीन शर्मा से बात करने से प्रदर्शनकारियों ने साफ इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें एसडीएम पर भरोसा नहीं है और वे पहले भी उनके खिलाफ बयान दे चुकी हैं। स्थिति ऐसी बन गई कि एसडीएम ओशीन शर्मा मौके पर मौजूद रहीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनसे कोई संवाद नहीं किया। नतीजतन, एसडीएम साहिबा कुछ दूरी पर खड़ी होकर हालात का जायजा लेती रहीं और बिना किसी बातचीत के ही उन्हें वापस लौटना पड़ा।
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900 दिनों से जारी है आंदोलन
दृष्टिबाधित जन संगठन के सदस्य पिछले करीब 900 दिनों से अपनी मांगों को लेकर सचिवालय के समीप धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
चेतावनी: आंदोलन होगा और उग्र
संगठन की मुख्य मांगों में विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिबाधित कोटे के लंबित पदों को भरना, नई भर्तियां शुरू करना और बजट में उनके लिए विशेष प्रावधान करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। यहां तक कि नग्न प्रदर्शन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने की भी चेतावनी दी गई है।
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सरकार पर अनदेखी का आरोप
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार केवल आश्वासन देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि जब भी वे आंदोलन तेज करते हैं, तब वार्ता के लिए बुलाया जाता है, लेकिन समाधान आज तक नहीं मिला। शिमला में बढ़ता यह आंदोलन अब सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का रुख दिन-ब-दिन सख्त होता जा रहा है।
