शिमला। हिमाचल प्रदेश को साल 2025 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने गहरे जख्म दिए थे। इस प्राकृतिक आपदा में जहां सैंकड़ों लोगों की जान चली गई थी, वहीं हजारों करोड़ की संपत्ति का नुकसान भी हुआ था। अब केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल को हुए इस भारी नुकसान की भरपाई के लिए अहम पहल शुरू की है। आगामी 19 मार्च को देश की राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्रालय एक हाई-प्रोफाइल बैठक करने जा रहा है, जिसमें हिमाचल द्वारा पेश किए गए आपदा क्लेम पर गहन मंथन होगा। 

 

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब प्रदेश में बजट सत्र की गहमागहमी होगी, लेकिन आपदा के दर्द को देखते हुए राजस्व विभाग के शीर्ष अधिकारियों को दिल्ली भेजने का निर्णय लिया गया है ताकि केंद्र के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा जा सके। दरअसल 19 मार्च को दिल्ली में बुलाई गई इस अहम बैठक में हिमाचल सरकार के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है।

इस बैठक में राज्य द्वारा भेजे गए पोस्ट डिजास्टर नीड असेस्मेंट क्लेम की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि इस बार केंद्र से बड़ी आर्थिक मदद मिल सकती है, जिससे आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को तेज गति मिल सकेगी।

 

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10 हजार करोड़ का क्लेम, केंद्र करेगा गहन समीक्षा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का आकलन करते हुए करीब 10,000 करोड़ रुपये का क्लेम केंद्र सरकार को भेजा है। इस क्लेम के आधार पर पहले ही केंद्र सरकार की संयुक्त टीम प्रदेश के कई प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुकी है और जमीनी हालात का जायजा ले चुकी है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय इस क्लेम की स्क्रूटनी करेगा और इसी के आधार पर हिमाचल को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर फैसला लिया जाएगा। राज्य सरकार को भरोसा है कि इस बार केंद्र सरकार आपदा से हुए व्यापक नुकसान को देखते हुए उदार मदद दे सकती है।

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बजट सत्र के बीच भी दिल्ली जाएंगे अधिकारी

दिल्ली में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के समय हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र चल रहा होगा। इसके बावजूद राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को इस बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली भेजा जाएगा। अधिकारी केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की स्थिति और नुकसान का विस्तृत ब्योरा पेश करेंगे, ताकि हिमाचल को अधिक से अधिक राहत राशि मिल सके।

2025 की आपदा ने छोड़े गहरे जख्म

वर्ष 2025 के मानसून ने हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही मचाई थी। इस दौरान बादल फटने की कई घटनाएं सामने आईं, दर्जनों फ्लैश फ्लड आए और बड़ी संख्या में भूस्खलन हुए। इन आपदाओं के कारण प्रदेश में सैकड़ों सड़कें कई दिनों तक बंद रहीं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस त्रासदी में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल और लापता भी हुए। कई गांवों में अभी भी पुनर्वास और राहत कार्य जारी हैं।

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सड़कों और पुलों को सबसे ज्यादा नुकसान

प्राकृतिक आपदा के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ। विभाग की सड़कों और पुलों को करीब 2,700 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा जल शक्ति विभाग और बिजली बोर्ड को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कई क्षेत्रों में पेयजल योजनाएं और बिजली व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहीए जिन्हें अब धीरे.धीरे बहाल किया जा रहा है।

2023 के अनुभव से सबक, इस बार मजबूत क्लेम

हिमाचल सरकार ने इस बार क्लेम तैयार करते समय वर्ष 2023 के अनुभवों से सबक लिया है। वर्ष 2023 में भी राज्य ने लगभग 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान आंका था, लेकिन केंद्र सरकार से केवल 2,067 करोड़ रुपये की ही मंजूरी मिल पाई थी। इनमें से राज्य के हिस्से को जोड़कर अब तक करीब 1,400 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जबकि तीसरी किस्त के करीब 600 करोड़ रुपये अभी मिलने बाकी हैं।

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इस बार ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद

प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि वर्ष 2025 के लिए तैयार किया गया क्लेम अधिक प्रभावी और विस्तृत है, इसलिए इस बार केंद्र से अधिक आर्थिक सहायता मिल सकती है। यदि केंद्र सरकार से पर्याप्त राहत राशि मिलती है तो इससे सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं और बिजली ढांचे के पुनर्निर्माण में तेजी आएगी। साथ ही आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में भी बड़ी मदद मिलेगी।

हिमाचल की नजर अब दिल्ली की बैठक पर

अब पूरे प्रदेश की नजर 19 मार्च को दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। इस बैठक को हिमाचल के लिए राहत की बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। यदि केंद्र सरकार से सकारात्मक फैसला आता है तो यह न सिर्फ आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए संजीवनी साबित होगाए बल्कि राज्य के विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।

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