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June 11, 2026
हिमाचल में बनेगी अटल टनल से भी बड़ी सुरंग, सालभर खुला रहेगा मनाली-लेह मार्ग
अटल टनल से लगभग दो किलोमीटर अधिक लंबी होगी ये टनल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश को अटल टनल ने विश्व मानचित्र पर एक नई पहचान दी थी। अब इससे भी बड़ी और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण सुरंगों के निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है।
केंद्र सरकार मनाली-लेह मार्ग पर तीन नई टनल बनाने जा रही है, जिनमें से एक की लंबाई 11 किलोमीटर होगी। इसके साथ ही यह सुरंग हिमाचल की अटल टनल से भी लंबी होगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही को नई मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में ऑल वेदर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जोजिला टनल के ब्रेकथ्रू कार्यक्रम के दौरान मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर तीन नई रणनीतिक सुरंगों के निर्माण की जानकारी दी।
इन सुरंगों का निर्माण बारालाचा, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला दर्रों के नीचे किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मनाली-लेह मार्ग वर्षभर खुला रहेगा और भारी बर्फबारी के दौरान भी लद्दाख का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क नहीं टूटेगा।
बारालाचा दर्रे के नीचे लगभग 13 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की योजना है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की संभावना है। इस परियोजना पर लगभग 8,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
लाचुलुंग ला दर्रे के नीचे करीब 11 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इसकी अनुमानित लागत 4,500 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसकी डीपीआर दिसंबर 2026 तक तैयार होने की संभावना है।
यह सुरंग विशेष रूप से इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध अटल टनल की लंबाई 9.02 किलोमीटर है, जबकि प्रस्तावित नई सुरंग 11 किलोमीटर लंबी होगी। यानी यह अटल टनल से लगभग दो किलोमीटर अधिक लंबी होगी।
लद्दाख के तंगलंग ला दर्रे के नीचे पांच किलोमीटर लंबी सुरंग प्रस्तावित है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,250 करोड़ रुपये है और इसकी डीपीआर मार्च 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चीन तथा पाकिस्तान से लगती सीमाओं को देखते हुए इन परियोजनाओं को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अटल टनल, जोजिला टनल और प्रस्तावित शिंकुला टनल के साथ इन नई सुरंगों के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की तैनाती और रसद आपूर्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी।
बारालाचा, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला जैसे ऊंचे दर्रे भारी बर्फबारी के कारण अक्सर बंद हो जाते हैं। इन दर्रों के नीचे बनने वाली सुरंगें न केवल यात्रा को सुरक्षित बनाएंगी, बल्कि लेह तक पहुंचने का समय भी कम करेंगी। इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।