#अव्यवस्था
March 12, 2026
हिमाचल में नहीं मिल रहा गैस सिलेंडर : होटलों का काम ठप्प, शादियों की बुकिंग करनी पड़ रही कैंसिल
खाने के मेन्यू में भी हुआ बड़ा बदलाव, कई चीजें हटाई गई
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शिमला। खाड़ी देशों के बीच चल रहे तनाव के कारण देशभर में LPG आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। अब इसका असर अब पर्यटन नगरी शिमला में भी दिखाई देने लगा है। शिमला में इन दिनों LPG गैस की किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को मुश्किल में डाल दिया है।
शिमला शहर के कई होटलों को कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। इससे किचन का कामकाज प्रभावित हो गया है और होटल कारोबारियों के सामने गंभीर स्थिति खड़ी हो गई है।
बताया जा रहा है कि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति रुकने के कारण कई होटलों को अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ा है। जिन व्यंजनों को बनाने में ज्यादा गैस खर्च होती है, उन्हें फिलहाल मेन्यू से हटा दिया गया है।
तली हुई चीजें, चाइनीज फूड और अन्य गैस-आधारित पकवानों को बंद कर दिया गया है। कई जगहों पर गैस बचाने के लिए चाय तक बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों पर बनाई जा रही है।

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ा है। कई होटलों के किचन में रखे सभी सिलेंडर खाली हो चुके हैं और नए सिलेंडर कब मिलेंगे, इस बारे में गैस कंपनियों या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
इस स्थिति के कारण कुछ होटल मालिकों को मजबूरी में शादी और अन्य कार्यक्रमों की बुकिंग भी रद्द करनी पड़ रही है। बुकिंग रद्द होने से होटल कारोबारियों को ग्राहकों को पैसे लौटाने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
शहर के कुछ प्रमुख होटलों ने स्थिति को देखते हुए अपने मेहमानों के लिए सीमित मेन्यू की व्यवस्था की है। होटल लॉर्ड्स ग्रे और होटल लैंडमार्क जैसे होटलों ने घोषणा की है कि गैस संकट के कारण फिलहाल मेहमानों को साधारण भोजन जैसे दाल, रोटी, सब्जी और चावल ही परोसे जाएंगे। इन होटलों के किचन में गैस की बचत के लिए अधिकतर काम सीमित कर दिया गया है। चाय और कुछ अन्य हल्के खाद्य पदार्थ इंडक्शन चूल्हों पर तैयार किए जा रहे हैं।
होटल लैंडमार्क के मालिक राजीव अग्रवाल ने बताया कि गैस संकट के कारण उन्हें पिछले दो दिनों में ही करीब डेढ़ लाख रुपये की बुकिंग राशि ग्राहकों को लौटानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि कई ग्राहकों को कार्यक्रम रद्द होने की वजह से निराशा हुई और कुछ ने नाराजगी भी जताई।
राजीव अग्रवाल का कहना है कि जब होटल के पास खाना बनाने के लिए गैस ही उपलब्ध नहीं है, तो मेहमानों को भोजन परोसना संभव नहीं हो पाता। इसी कारण कुछ पार्टियां और कार्यक्रम भी रद्द करने पड़े हैं।
इस पूरे मामले को लेकर शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंद्र कुमार सेठ ने बताया कि कमर्शियल LPG सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने से होटल उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर मांग की गई है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक होटलों को सीमित मात्रा में घरेलू LPG सिलेंडर उपलब्ध करवाने की अनुमति दी जाए, ताकि कम से कम बुनियादी रसोई सेवाएं जारी रखी जा सकें।
एसोसिएशन का कहना है कि गैस की कमी के कारण कई होटलों की रसोई आंशिक या पूरी तरह बंद करनी पड़ रही है। इससे मेहमानों को भोजन उपलब्ध कराने में परेशानी आ रही है और होटल कर्मचारियों के लिए भी भोजन तैयार करना मुश्किल हो गया है।
गैस संकट का असर अब पर्यटन उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। ट्रैवल एजेंट्स के अनुसार कई पर्यटक फोन करके यह जानकारी ले रहे हैं कि शिमला के होटलों में भोजन की व्यवस्था ठीक तरह से हो पा रही है या नहीं।
होटल कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो पर्यटन सीजन के दौरान होटल उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और इसका असर शिमला आने वाले पर्यटकों की संख्या पर भी पड़ सकता है।
उधर, राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है और केंद्र सरकार के साथ भी संपर्क बनाए रखा गया है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने बताया कि होटल एसोसिएशन की ओर से राहत की मांग की गई है और इस मुद्दे पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
हालांकि, शिमला में मीडिया द्वारा गैस संकट को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और इस विषय पर टिप्पणी करने से परहेज किया। फिलहाल होटल उद्योग को उम्मीद है कि जल्द ही गैस आपूर्ति बहाल होगी, ताकि पर्यटन सीजन के दौरान होटल और रेस्टोरेंट सामान्य रूप से अपने किचन संचालन को जारी रख सकें।