#विविध
June 10, 2026
सुक्खू सरकार ने दी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती, MLA के वोटिंग राइट के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची
विधायक के मतदान अधिकार को लेकर विवाद
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शिमला। नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रहे कानूनी विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने शीर्ष अदालत से मांग की है कि स्थानीय विधायकों को इन चुनावों में मतदान का अधिकार बहाल किया जाए।
दरअसल, हाल ही में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए उस सरकारी स्पष्टीकरण पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत संबंधित क्षेत्र के विधायक को नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान करने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम राहत प्रदान की थी।
यह मामला तब शुरू हुआ जब कई नगर निकायों के निर्वाचित पार्षदों ने अदालत का रुख किया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि स्थानीय निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल जनता द्वारा चुने गए पार्षदों का अधिकार है। उनके अनुसार विधायक परिषद की बैठकों और प्रस्तावों पर मतदान कर सकते हैं, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन में उनकी भागीदारी कानून की भावना के अनुरूप नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी थी कि जिस प्रकार नामित सदस्य इन चुनावों में वोट नहीं डाल सकते, उसी प्रकार विधायक को भी यह अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में इन तर्कों को पर्याप्त मानते हुए सरकार के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
इस विवाद का सीधा असर चंबा नगर परिषद पर भी पड़ा है। यहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायक के मतदान अधिकार के इस्तेमाल को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी थी। साथ ही चुनाव से जुड़े गैजेट नोटिफिकेशन और अन्य प्रशासनिक आदेशों को भी फिलहाल प्रभावी न मानने के निर्देश दिए गए थे।
अब राज्य सरकार का मानना है कि विधायकों को मतदान से वंचित करना स्थानीय निकायों से जुड़े प्रावधानों की गलत व्याख्या है। इसी आधार पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करने और विधायकों के मतदान अधिकार को बहाल करने की मांग की है।
इस मामले का असर प्रदेश के कई नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनावों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों के चुनाव में विधायकों की भूमिका क्या होगी।