नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में एक परिवार पर नियति ने ऐसा क्रूर खेल खेला कि उसके दो फौजी बेटों को मात्र दो माह में ही उनसे छीन लिया। जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। बड़ी बात यह है कि दोनों सगे भाई एक साथ सेना में भर्ती हुए थे और एक साथ ही रिटायर्ड हुए थे। अब दो माह के बीच में दोनों की मौत भी एक जैसी ही हुई है। दो रिटायर्ड फौजी भाइयों की इस तरह अचानक मौत से पूरा परिवार पूरी तरह बिखर गया है और पूरे गिरिपार सहित शिलाई क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
शिलाई क्षेत्र के ढांढस गांव के वीर सपूत एवं भारतीय सेना की 12वीं डोगरा रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हवलदार गोपाल सिंह बिरसांटा के आकस्मिक निधन ने हर आंख को नम कर दिया है।
शनिवार को उनके पैतृक गांव ढाडस में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
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सीने में दर्द के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार गोपाल सिंह बिरसांटा अपने परिवार के साथ नाहन में रह रहे थे। 27 मई की शाम उन्हें अचानक सीने में हल्का दर्द महसूस हुआ। इसके बाद वह स्वयं उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर भेज दिया, लेकिन अगले दिन सुबह अचानक उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। परिजन आनन-फानन में उन्हें फिर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। गोपाल बिरसांटा के निधन की खबर मिलते ही परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
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दो महीने पहले हुई थी बड़े भाई की मौत
इस घटना ने इसलिए भी हर किसी को झकझोर दिया क्योंकि अभी परिवार बड़े भाई दीप बिरसांटा की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था। करीब दो महीने पहले ही बड़े भाई और पूर्व सैनिक दीप बिरसांटा का भी हृदयाघात के कारण निधन हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार दोनों भाई बचपन से बेहद करीब थे। दोनों ने एक साथ सेना जॉइन की, वर्षों तक देश सेवा की और एक साथ सेवानिवृत्त होकर गांव लौटे थे। लेकिन अब दो महीने के भीतर दोनों भाइयों की मौत ने पूरे परिवार को अंदर तक तोड़ दिया है।
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घर से दो माह में उठी दो बेटों की अर्थी
ढाडस गांव में लगातार दूसरी बार मातम का माहौल देखने को मिला। परिवार के आंगन से फिर एक बार अर्थी उठी तो गांव के लोगों की आंखें भर आईं। हर कोई यही कहता नजर आया कि शायद ही किसी परिवार ने इतने कम समय में इतना बड़ा दुख देखा हो। परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि बच्चे अब भी इस सदमे को समझ नहीं पा रहे।
मासूम बेटों ने दी मुखाग्नि, सैन्य सम्मान के साथ दी विदाई
शुक्रवार को जब गोपाल बिरसांटा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव ढाडस पहुंचा, तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान पूरा गांव उमड़ पड़ा। उनके 12 वर्षीय पुत्र गौरव और छोटे बेटे रैयांश ने जब अपने पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं। अंतिम यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र “गोपाल फौजी अमर रहे” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
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सेना में निभाई अहम जिम्मेदारियां
गोपाल बिरसांटा किसान परिवार से संबंध रखते थे और भारतीय सेना की 12 डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने देश के कई दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में सेवाएं दीं। क्षेत्र के लोग उन्हें अनुशासनप्रिय, मिलनसार और देशभक्त सैनिक के रूप में याद कर रहे हैं। उनके निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचा है। स्वर्गीय गोपाल बिरसांटा अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, एक बेटी और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
