शिमला। हिमाचल प्रदेश में नई परिसर (स्कूल कॉम्प्लेक्स) प्रणाली को लेकर सियासी और शैक्षणिक माहौल गरमा गया है। प्रदेश की सुक्खू सरकार और प्राथमिक शिक्षक आमने-सामने आ गए हैं। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों जेबीटी शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और शिक्षक प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन यह वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद शिक्षक संघ ने आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू करने का ऐलान कर दिया।
15 दिन की यात्रा के बाद राजधानी में शक्ति प्रदर्शन
हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने 11 जुलाई को बगलामुखी मंदिर से 'प्राथमिक शिक्षा बचाव न्याय यात्रा' शुरू की थी। करीब 15 दिनों तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए यह यात्रा रविवार को शिमला पहुंची। इसके बाद चौड़ा मैदान में हजारों शिक्षकों ने प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
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मुख्यमंत्री पहुंचे धरना स्थल, लेकिन नहीं बनी बात
धरने के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शिक्षक प्रतिनिधियों से मिलने पहुंचे और उनकी मांगों पर चर्चा की। हालांकि दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। सीएम सुक्खू ने शिक्षक दिवस से पहले न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम में बदलावा या उसे वापस लेने का भरोसा दिया था। इसके अलावा शिक्षकों के निलंबन और दर्ज एफआईआर को भी वापस लेने की बात कही थी, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही। अब शिक्षक संगठन अपने रुख पर कायम रहा और क्रमिक अनशन शुरू करने की घोषणा कर दी।
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शिक्षकों ने उठाए कई बड़े सवाल
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश का कोई भी प्राथमिक शिक्षक नई परिसर प्रणाली से संतुष्ट नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षकों की नई भर्ती करने के बजाय मौजूदा शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार डालने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों के 5,000 से अधिक पद खाली हैं, नर्सरी शिक्षकों की भर्ती भी नहीं हो रही है और प्राथमिक विद्यालय पहले से ही स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
'अधिसूचना वापस नहीं हुई तो आंदोलन जारी रहेगा'
शिक्षक संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक नई परिसर प्रणाली की अधिसूचना वापस नहीं ली जाती और लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर यह संघर्ष लंबे समय तक चलाया जाएगा और इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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शिक्षकों का दावा- व्यवस्था से प्रभावित होगी प्राथमिक शिक्षा
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से प्राथमिक स्कूलों की स्वायत्तता प्रभावित होगी। इसके अलावा जेबीटी शिक्षकों और प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की प्रशासनिक भूमिका भी कमजोर पड़ जाएगी। उनका मानना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले शिक्षक संगठनों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी।
सरकार का पक्ष भी आया सामने
दूसरी ओर शिक्षा विभाग का कहना है कि नई परिसर (स्कूल कॉम्प्लेक्स) प्रणाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत लागू की जा रही है। विभाग के अनुसार, इसके तहत आसपास के कई विद्यालयों को एक समूह में जोड़कर एक लीड स्कूल के माध्यम से संचालित किया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, शिक्षकों के बीच समन्वय बढ़ेगा और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
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आंदोलन पर टिकी सबकी नजरें
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और शिक्षक संघ के बीच आगे होने वाली वार्ता से कोई समाधान निकलता है या फिर यह आंदोलन और उग्र रूप लेता है। फिलहाल शिमला में शिक्षक अपने आंदोलन और क्रमिक अनशन को लेकर पूरी तरह अडिग नजर आ रहे हैं।
