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July 26, 2026
हाद*से ने रुलाया हिमाचल: मां के सीने से लिपटी मिली 6 माह की मासूम, एक साथ हुआ अंतिम संस्कार
मायके जाने के लिए निकली थीं सोनम
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लाहौल। हिमाचल प्रदेश को झकझोर देने वाले लाहौल-पांगी सीमा भूस्खलन हादसे की एक तस्वीर हर किसी की आंखें नम कर रही है। मलबे में दबने के बाद जब राहत दल ने मां-बेटी को बाहर निकाला, तो छह माह की मासूम अपनी मां के सीने से लिपटी हुई थी। सोनम आगमो ने मौत के आखिरी पल तक अपनी बच्ची को बाहों में थामे रखा। मां की ममता और बेटी का यह आखिरी साथ देखकर हर कोई भावुक हो उठा। हादसे के बाद जब मां और मासूम बेटी की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरा गांव ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल की आंखें नम हो गईं।
जानकारी के अनुसार, सोनम आगमो अपने पति छेरिंग दोरजे के साथ उदयपुर के छालिंग गांव में रहती थीं। सोनम अपनी छह माह की बेटी को लेकर मायके परमार गांव जा रही थीं। बताया जा रहा है कि वह अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर टैक्सी से सफर कर रही थीं। परिवार को शायद अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर मां और बेटी का आखिरी सफर बन जाएगा।
इसी दौरान लाहौल-पांगी सीमा पर कडू नाला के पास अचानक पहाड़ी दरक गई। देखते ही देखते भारी चट्टानें और मलबा नीचे आ गिरा। मलबे की चपेट में एक टैक्सी आ गई, जिसमें कई लोग सवार थे। हादसा इतना भयानक था कि वाहन में सवार लोग मलबे के नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और बचाव अभियान शुरू किया गया।
हादसे के बाद राहत दल ने मलबा हटाने का काम शुरू किया। बेहद मुश्किल हालात के बीच बचावकर्मियों ने घंटों तक कड़ी मेहनत की। भारी चट्टानों और मलबे को हटाने के बाद जब मां और बेटी के शव सामने आए, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया।
राहत दल को सोनम अपनी छह माह की बेटी को सीने से लगाए हुए मिलीं। ऐसा लग रहा था जैसे आखिरी पल तक मां अपनी मासूम बच्ची को बचाने की कोशिश कर रही हों। मां और बेटी का एक-दूसरे से इस तरह लिपटा हुआ मिलना हर किसी को अंदर तक झकझोर गया। इस मार्मिक दृश्य ने राहतकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों की आंखों में आंसू ला दिए।
सोनम और उनकी मासूम बेटी की यह कहानी पूरे हिमाचल को भावुक कर रही है। हादसे ने मां-बेटी को हमेशा के लिए दुनिया से छीन लिया, लेकिन मौत भी दोनों को एक-दूसरे से अलग नहीं कर सकी। जिस तरह मां अपनी बेटी को सीने से लगाए मिलीं, वह दृश्य इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर बन गया है।
हादसे के बाद सोनम और उनकी बेटी के शवों को उनके पैतृक गांव छालिंग लाया गया। यहां मां और बेटी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। जब एक ही परिवार से मां और छह माह की मासूम बेटी की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरा गांव गम में डूब गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
मां और बेटी की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार शामिल हुए। हर किसी की जुबान पर सोनम और उनकी मासूम बेटी की दर्दनाक कहानी थी। जिस बच्ची को मां अपनी गोद में लेकर मायके जा रही थी, उसी बच्ची की अर्थी मां के साथ उठेगी, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को गहरे दुख में डाल दिया है।
इस भीषण भूस्खलन हादसे में कुल 11 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शनिवार को सभी मृतकों का उनके पैतृक गांवों में अंतिम संस्कार किया गया।
आरसी पांगी अमनदीप सिंह ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार चंद्रभागा नदी के किनारे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और नम आंखों से मृतकों को अंतिम विदाई दी।