#विविध
September 9, 2026
हिमाचल में अब डाकिया नहीं, ड्रोन पहुंचा रहा चिट्ठियां : 10 मिनट में घर-घर पहुंच रही डाक
माइनस 10 से 50 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में अब डाक पहुंचाना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। डाक विभाग ने ड्रोन के जरिए डाक पहुंचाने की नई पहल शुरू की है। अब जहां सड़क के रास्ते पहुंचने में घंटों लग जाते थे, वहां ड्रोन महज कुछ मिनटों में जरूरी डाक पहुंचा रहा है। हिमाचल में इस सेवा का लगातार विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरदराज के लोगों को तेज और बेहतर डाक सुविधा मिल रही है।
मंडी के रेहड़धार इलाके से 12 जून 2026 को पहली बार ड्रोन के जरिए डाक पहुंचाने की शुरुआत हुई थी। इसके बाद इस सेवा का लगातार विस्तार किया जा रहा है। 17 अगस्त 2026 को इस नेटवर्क से चार और शाखा डाकघरों को जोड़ा गया। मंडी पोस्ट ऑफिस के सीनियर सुपरिटेंडेंट संजय ने इसकी जानकारी दी।

संजय ने बताया कि मंडी मुख्य डाकघर से रेहड़धार, पधियूं, जोगिंद्रनगर, ब्यू, रंधाडा, अलाथू, टिल्ली और मझवाड़ तक ड्रोन के जरिए डाक भेजी जा रही है। इन जगहों की दूरी मंडी हेड पोस्ट ऑफिस से करीब 9 से 15 किलोमीटर है। पहले सड़क के रास्ते इन इलाकों तक डाक पहुंचाने में दो से तीन घंटे लग जाते थे, लेकिन अब ड्रोन सिर्फ 5 से 10 मिनट में डाक पहुंचा रहा है।

सुबह करीब 9 से 10 बजे के बीच मंडी से अलग-अलग शाखा डाकघरों के लिए रोजाना ड्रोन से 7 से 10 किलो तक डाक भेजी जाती है। ड्रोन के जरिए डाक शाखा डाकघरों तक पहुंचाई जाती है और वहां से लोगों को उसी दिन डाक मिल जाती है। इसके अलावा मंडी डिवीजन के केलांग को भी जल्द ही इस ड्रोन सेवा से जोड़ने की तैयारी है।
ड्रोन से पहुंचने वाली डाक का वितरण शाखा डाकघर में उसी दिन कर दिया जाता है। इससे लोगों को पहले के मुकाबले काफी कम समय इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि बरसात के दौरान खराब मौसम के कारण ड्रोन सेवा दो से तीन दिन तक प्रभावित हुई। मौसम खराब होने पर ड्रोन की उड़ान का समय भी बदला जाता है। इसके बावजूद पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में डाक पहुंचाने के लिए यह सेवा काफी मददगार साबित हो रही है।


Sky Air के गुरुग्राम स्थित मुख्य कार्यालय से मैनेजमेंट सदस्य सुभाष दुबे ने बताया कि इन ड्रोन की रेंज करीब 15 से 20 किलोमीटर तक है। हिमाचल में ड्रोन से डाक पहुंचाने का नेटवर्क लगातार बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल प्रदेश में 15 ड्रोन काम कर रहे हैं और इनके जरिए करीब 110 डाकघरों को जोड़ा जा चुका है।
इन ड्रोन की खास बात यह है कि इनमें फिजिकल एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ड्रोन तेज हवाओं, घने बादलों और अचानक बदलने वाले मौसम का खुद आकलन कर सकता है। जरूरत पड़ने पर यह अपना रास्ता भी बदल सकता है। यही वजह है कि पहाड़ी और मुश्किल इलाकों में इसे डाक पहुंचाने के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
यह ड्रोन माइनस 10 डिग्री से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम कर सकता है। ऐसे में हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में बदलते मौसम और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
ड्रोन डाक सेवा से पहाड़ों में डाक पहुंचाने में लगने वाला समय और दूरी दोनों कम हो रहे हैं। खासकर ऐसे इलाकों में जहां सड़क से पहुंचना मुश्किल और समय लेने वाला है, वहां ड्रोन काफी मददगार साबित हो सकता है। आने वाले समय में इस सेवा का विस्तार होने से हिमाचल के और भी दूरदराज इलाकों तक डाक और जरूरी सेवाएं तेजी से पहुंचाई जा सकती हैं।