शिमला। देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल में आज भी कई प्राचीन मान्यताओं को माना जाता है और उन्हें निभाय भी जाता है। ऐसी ही एक प्राचीन परम्परा को निभाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है और हिमाचल की सुक्खू सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस प्रदेश की राजधानी शिमला के रोहड़ू में 2 से पांच फरवरी तक आयोजित किए गए भुंडा महायज्ञ में पशु बलि देने पर भेजा गया है। 

भूंडा महायज्ञ में पशु बलि देने पर विवाद

दरअसल इस समारोह के शुरू होने से एक सप्ताह पहले ही याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित डीसी, पुलिस अधीक्षक सहित एसडीएम रोहड़ू को कानूनी नोटिस भेजा गया था। जिसमें भूंडा महायज्ञ में दी जाने वाली पशु बलि पर रोक लगाने की मांग की गई थी। लेकिन इसके बावजूद भूंडा महायज्ञ में पशुओं की बलि दी गई। जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। 

 

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सुप्रीम कोर्ट ने सुक्खू सरकार को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की खंडपीठ ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इस समारोह के आयोजन से करीब एक सप्ताह पहले ही पशु बलि पर रोक लगाने की मांग की गई थी। लेकिन सरकार और प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और खुलेआम पशुआंे की बलि दी गई। 

 

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खुलेआम पशुओं की बलि का वीडियो भी हुआ था वायरल

शिकायतकर्ता ने खुलेआम पशुओं की बलि का एक वीडियो जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा था को सूबत के रूप में कोर्ट में पेश किया है। इस वीडियो में बलि देने का दृश्य साफ साफ दिख रह है। अब देखना यह है कि हिमाचल सरकार इस मामले में क्या सफाई देती है। अदालत में अब इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। 

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कुल्लू दशहरा में कुछ शर्तों पर मिली है पशु बलि की अनुमति

बता दें कि इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2014 में मंदिरों में पशु बलि देने की प्रथा पर रोक लगा दी थी। हिमाचल के कुल्लू जिला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में भी पशु बलि पर रोक लगाई गई थी। जिसको भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में पशुओं की बलि देने की परंपरा है। जो सदियों से चली आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने छड़ीबरदार महेश्वर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुल्लू दशहरा में कुछ शर्तों के साथ पशु बलि देने की अनुमति दे दी थी। 

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