शिमला। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और ड्रोन हमलों की आशंका के बीच हिमाचल प्रदेश में एक अनदेखी चुनौती सामने आ रही है और वो है सोलर स्ट्रीट लाइट्स। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत हजारों की संख्या में गांव-गांव और शहरों की गलियों में लगाई गई ये सोलर लाइट अब ब्लैकआउट के प्रयासों में सबसे बड़ी बाधा बनती जा रही हैं। ये लाइट रात में अपने आप जल उठती हैं और इन्हें बंद करने के लिए न कोई स्विच है, न ही साधारण व्यक्ति के लिए इन्हें डिस्कनेक्ट कर पाना आसान है।

गड़बड़ी का कारण बनीं सोलर लाइटें

हाल ही में शिमला सहित कई जिलों में मॉक ड्रिल के दौरान ब्लैकआउट की एडवाइजरी जारी की गई, जहां आम जनता ने अपने घरों की बिजली तो बंद कर दी, लेकिन सार्वजनिक स्थलों की सोलर लाइटें रातभर जलती रहीं। यह दृश्य न केवल ड्रोन हमले जैसे खतरे में सुरक्षा में सेंध लगा सकता है, बल्कि अभ्यास की गंभीरता को भी प्रभावित करता है।

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30 हजार से अधिक सोलर लाइटें

प्रदेश की 3577 पंचायतों और 200 से अधिक शहरी निकायों में इन लाइट्स की संख्या 30 हजार से पार हो चुकी है। कई पंचायतों में 50 से ज्यादा और शहरों में 200 से अधिक लाइटें लगी हैं। ये लाइटें 12 फीट ऊंचे पोल पर लगी हैं, जिससे न इन्हें आसानी से बंद किया जा सकता है और न ही काले कपड़े से ढकना संभव है।

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काले कपड़े से ढकने की एडवाइजरी जारी

विशेषकर पंजाब सीमा से लगे ऊना और कांगड़ा जिलों में सुरक्षा एजेंसियों और डीसी कार्यालयों ने सोलर लाइटों को ढकने के निर्देश जारी किए हैं। शहरी विकास विभाग और पंचायती राज विभाग अब इस समस्या को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की प्रक्रिया में हैं, जो दो दिनों में जारी की जा सकती है। तब तक के लिए स्थानीय प्रशासन ने पंचायतों से अपील की है कि वे सुरक्षा को प्राथमिकता दें और विकल्प तलाशें।

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