शिमला। हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनाव इस बार कई अनोखी कहानियों के गवाह बने हैं। कहीं प्रधान पद का फैसला महज 2 वोटों से हुआ, तो कहीं 7 वोटों ने जीत-हार की तस्वीर बदल दी।

हिमाचल की इस पंचायत ने युवाओं को दिया मौका

कहीं 96 वर्षीय बुजुर्ग ने चुनाव लड़कर उम्र को चुनौती दी, तो कहीं युवाओं ने लोकतंत्र की नई तस्वीर पेश करते हुए नेतृत्व की कमान अपने हाथों में ले ली। इन तमाम दिलचस्प नतीजों के बीच शिमला जिले की शदी जोधपुर पंचायत से सामने आई कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक बनकर उभरी है।

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24 साल की प्रधान, 26 साल का उप-प्रधान

ठियोग उपमंडल की शदी जोधपुर पंचायत में मतदाताओं ने अनुभव से ज्यादा युवा सोच पर भरोसा जताया है। यहां महज 24 वर्षीय ऋचा वेकटा ने प्रधान पद का चुनाव जीतकर नया इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि पंचायत की कमान संभालने के लिए जनता ने उपप्रधान पद पर भी 26 वर्षीय लोकेंद्र को चुना है। इस तरह पंचायत के दोनों शीर्ष पद अब युवाओं के हाथों में होंगे।

युवाओं पर जताया भरोसा

पंचायत चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में इस युवा जोड़ी की चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बदलते समय के साथ युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है और जनता अब नई सोच और नई ऊर्जा को अवसर देना चाहती है।

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24 वर्ष की उम्र में प्रधान बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं 26 वर्षीय लोकेंद्र का उपप्रधान चुना जाना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

7 वोटों से जीतीं प्रीतिका

इस बार पंचायत चुनावों में कई दिलचस्प नतीजे देखने को मिले। ठियोग की चियोग पंचायत में प्रीतिका ने अपनी प्रतिद्वंद्वी सरोज को महज 7 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। वहीं लाहौल-स्पीति की गौशाल पंचायत में रमेश सोलमी ने पूर्व प्रधान अजीत सिंह को केवल 2 वोटों के अंतर से पराजित कर चुनावी रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया।

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कर्मचारी नेताओं ने भी लड़ा चुनाव

दूसरी ओर सोलन जिले की समोग पंचायत में कर्मचारी नेता सुरेंद्र ठाकुर ने प्रधान पद का चुनाव जीतकर अलग पहचान बनाई। वहीं प्रदेश के कई हिस्सों में वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं की जीत ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में उम्र नहीं, बल्कि जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत होती है।

नई उम्मीदों के साथ नई शुरुआत

शदी जोधपुर पंचायत में ऋचा वेकटा और लोकेंद्र की जीत को केवल चुनावी परिणाम नहीं बल्कि बदलती ग्रामीण राजनीति का संकेत माना जा रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर होगी कि यह युवा नेतृत्व पंचायत के विकास, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में क्या नया बदलाव लेकर आता है। फिलहाल पंचायत में जश्न का माहौल है और लोग इस युवा जोड़ी से नई उम्मीदें लगाए बैठे हैं।

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