बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश की धरती पर ऐसे वीरों और वीरांगनाओं मे जन्म लिया है- जिन्होंने असाधारण साहस से हमेशा समाज को प्रेरित किया है। ऐसी ही एक मिसाल पेश की थी बिलासपुर जिले की बेटी शिल्पा शर्मा ने।
तेंदुए के जबड़े से बचाया भाई
शिल्पा ने अपने छोटे भाई अंशुल को आदमखोर तेंदुए के जबड़े से खींचकर मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। यह घटना सिर्फ बहादुरी की कहानी नहीं है, बल्कि भाई-बहन के उस पवित्र रिश्ते की गवाही है जिसमें बहन अपने भाई की सुरक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगा देती है।
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स्कूल जा रहे थे भाई-बहन
यह साहसिक घटना 27 अक्तूबर, 2012 को हुई थी। उस समय शिल्पा महज 14 साल की थीं और नौवीं कक्षा में पढ़ती थीं। जबकि उनका भाई अंशुल छठी कक्षा का छात्र था। दोनों रोज की तरह स्कूल पैदल जा रहे थे।
भाई को ले गया तेंदुआ
सुनसान रास्ते से गुजरते हुए अचानक झाड़ियों से एक खूंखार तेंदुआ बाहर निकला और अंशुल पर टूट पड़ा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, तेंदुआ अंशुल को जबड़े में दबाकर घसीटने लगा।
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बैग से तेंदुए को पीटा
उस पल को सोचकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन शिल्पा ने हिम्मत नहीं खोई। उन्होंने स्कूल बैग को हथियार बनाया और तेंदुए पर टूट पड़ीं। जोर-जोर से चिल्लाते हुए उन्होंने पूरे साहस से अपने भाई को बचाने की कोशिश की।
भाई की जान बची
शिल्पा की बहादुरी और आवाज से आसपास के लोग भी मौके पर आ पहुंचे और आखिरकार तेंदुआ अंशुल को छोड़कर भाग निकला। हालांकि अंशुल गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसे लंबे समय तक अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा, लेकिन उसकी जान बच गई।
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मौत के मुंह से निकाला
उस दिन बहन ने खुद को ढाल बनाकर भाई को मौत के मुंह से निकाला। यह घटना साबित करती है कि भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ प्यार और नोकझोंक तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें एक-दूसरे के लिए बलिदान की भावना भी छिपी होती है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
घटना के बाद शिल्पा की वीरता पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। घुमारवीं के तत्कालीन विधायक राजेश धर्माणी ने उनका नाम राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया। उनकी बहादुरी को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इसके बाद भी शिल्पा कई मंचों पर सम्मानित होती रहीं।
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आज भी है प्रेरणा
वर्तमान में शिल्पा कांगड़ा से बी.फार्मा की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और नौकरी की तैयारी कर रही हैं, जबकि अंशुल भी अपने करियर की दिशा में मेहनत कर रहा है। खास बात यह है कि शिल्पा की इस कहानी को अब हिमाचल प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, ताकि नई पीढ़ी को साहस और भाई-बहन के रिश्ते की ताकत के बारे में सीख मिल सके।
रिश्ते की गहराई की मिसाल
शिल्पा का साहस आज भी हर भाई-बहन के रिश्ते की गहराई को याद दिलाता है। जब बहन राखी पर भाई की लंबी उम्र की कामना करती है, तब यह घटना बताती है कि उस कामना के पीछे कितनी गहरी निष्ठा और बलिदान की भावना होती है। शिल्पा ने यह साबित कर दिया कि बहन के लिए भाई की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है-चाहे सामने मौत ही क्यों न खड़ी हो।
