शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) शिमला में डॉक्टर–मरीज मारपीट का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ राघव नरुला की सेवा समाप्ति के बाद प्रदेश के डॉक्टर संगठनों में भारी रोष है। डॉक्टरों का आरोप है कि इस पूरे मामले में सरकार और प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की है] जिससे डॉक्टर समुदाय का मनोबल टूट रहा है। नाराज डॉक्टर संगठनों ने अब आंदोलन का ऐलान करते हुए 26 दिसंबर को सामूहिक अवकाश और 27 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दे दी है।
IGMC में गेट मीटिंग, डॉक्टरों ने खोला मोर्चा
गुरुवार को IGMC शिमला के मुख्य द्वार पर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA), कंसल्टेंट्स एंड सीनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (CSA) और स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (SAMDCOT) के संयुक्त समर्थन में गेट मीटिंग आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में रेजिडेंट, कंसल्टेंट और सीनियर डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। बैठक में एक स्वर में डॉ. राघव नरुला की सेवा समाप्ति को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की गई।
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एकतरफा कार्रवाई का आरोप
डॉक्टर संगठनों का कहना है कि डॉ. राघव नरुला के खिलाफ की गई कार्रवाई बिना निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुने बिना की गई। उनका आरोप है कि केवल वायरल वीडियो के आधार पर जल्दबाजी में निर्णय लिया गया, जबकि घटनाक्रम के अन्य पहलुओं की अनदेखी की गई। डॉक्टरों ने कहा कि ऐसी एकतरफा कार्रवाई भविष्य में किसी भी डॉक्टर के साथ हो सकती है।
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26 दिसंबर को सामूहिक अवकाश
डॉक्टर संगठनों ने ऐलान किया है कि 26 दिसंबर को IGMC सहित पूरे प्रदेश के रेजिडेंट डॉक्टर एक दिन की सामूहिक कैजुअल लीव पर रहेंगे। इस दिन डॉक्टर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेंगे। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।
27 दिसंबर से हड़ताल की चेतावनी
डॉक्टरों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 27 दिसंबर तक उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो उसी दिन सुबह 9:30 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। हड़ताल के दौरान ओपीडी, नियमित सेवाएं और वैकल्पिक ऑपरेशन थियेटर सेवाएं बंद रहेंगी, जबकि केवल आपातकालीन सेवाएं ही संचालित होंगी।
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धमकियों और सुरक्षा चूक पर भी सवाल
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि डॉ. राघव को जान से मारने और देश छोड़ने जैसी धमकियां दी गईं, लेकिन इस संबंध में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। डॉक्टर संगठनों ने इन धमकियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही IGMC परिसर में भीड़ द्वारा डॉक्टरों को डराने-धमकाने, अस्पताल में अव्यवस्था फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कवरेज और अस्पताल की आंतरिक सुरक्षा में खामियों को लेकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया गया।
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क्या है पूरा विवाद
गौरतलब है कि 22 दिसंबर को IGMC में एक मरीज और डॉक्टर के बीच विवाद हाथापाई में बदल गया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। इसके बाद पहले डॉ. राघव नरुला को निलंबित किया गया और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद की गई। अब इस फैसले के खिलाफ डॉक्टर संगठनों का उग्र विरोध सामने आ गया है, जिससे IGMC और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री से होने वाली बैठक इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।
