शिमला।हिमाचल की राजनीति में ‘राजा साहब’ के नाम से प्रसिद्ध वीरभद्र सिंह आज होते तो अपनी चौथी जयंती मना रहे होते। लेकिन वक्त ने वो मोहलत नहीं दी जिसकी उन्हें सबसे ज़्यादा ख्वाहिश थी अपनी आत्मकथा पूरी करने की।

वो किताब जो अधूरी रह गई

उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा था कि मैं अपने जीवन के अनुभवों को किताब में ढालूंगा, ताकि युवा पीढ़ी को राजनीति, समाज और संघर्षों की असल तस्वीर दिखा सकूं।
लेकिन 8 जुलाई 2021 की सुबह 3:40 बजे IGMC शिमला में जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तो वो किताब अधूरी ही रह गई।

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छह बार मुख्यमंत्री, लेकिन खुद की कहानी अधूरी

वीरभद्र सिंह हिमाचल के इतिहास में छह बार मुख्यमंत्री बनने वाले इकलौते नेता थे। वह पंडित जवाहरलाल नेहरू के करीबी माने जाते थे और नेहरू ही उन्हें राजनीति में लाए थे। उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के साथ मिलकर केंद्र में भी अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उनका जीवन किसी जीवंत दस्तावेज़ से कम नहीं था राजपरिवार से लोकतंत्र तक, संघर्ष से सत्ता तक,पर अफसोस कि यह दस्तावेज़ अब कभी नहीं लिखा जाएगा।

कभी कहा था मैं खुली किताब हूं

राजा साहब हमेशा कहते थे  कि मैं अपना जीवन छुपाता नहीं, मैं खुली किताब हूं। पर शायद यही भरोसा था कि वो अपनी कहानी खुद लिखेंगे, पर बीमारी, जिम्मेदारियां और राजनीति की दौड़ने उन्हें वक्त ही नहीं दिया।

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जयंती पर प्रदेश कर रहा श्रद्धांजलि अर्पित

आज वीरभद्र सिंह की चौथी जयंती पर शिमला, रामपुर और सराहन में कांग्रेस कार्यकर्ता, समर्थक और आम लोग उन्हें याद कर रहे हैं। उनके चबरख पर रामपुर में लोगों का तांता लगा हुआ है। और हर कोई राजा साहब ही पुरानी बातें याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है।

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