मंडी। मंडी के जोनल अस्पताल का पीएसए प्लांट एक साल से बंद है। सरकारी प्रक्रिया से एक ठेकेदार को प्लांट को सुधारने का साढ़े 3 लाख का ठेका भी दिया गया है। लेकिन ठेकेदार पांच महीने से गायब है। मजबूरन अस्पताल प्रबंधन बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर लाने पर अभी तक 10 लाख फूंक चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में इस पीएसए प्लांट का तोहफा दिया था।
अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही
अस्पताल प्रबंधन पीएम मोदी के इस तोहफे की सही देखभाल नहीं कर पाया। समय पर सर्विस न होने से प्लांट के कंप्रेसर खराब हो गए। मामला उच्चाधिकारियों के सामने आने पर प्लांट की सर्विस के लिए 3 लाख 52 हजार का बजट मिला। बजट का पैसा पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिकल विंग को ट्रांसफर हुआ और वहां से इसका टेंडर हो चुका है। मगर जिस ठेकेदार को टेंडर मिला है, वो इस काम को नहीं कर रहा है। जिसके चलते प्लांट अभी तक सुचारू नहीं हो पाया है। अब पीडब्लूडी का इलेक्ट्रिकल विंग प्लांट की जल्द मरम्मत का भरोसा दिला रहा है।
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मरीज को बिस्तर पर ही दी जाती है ऑक्सीजन की सुविधा
पीएम केयर के तहत लगे इस पीएसए प्लांट की क्षमता एक हजार लीटर प्रति मिनट की है। यह उच्च क्षमता वाला पीएसए प्लांट है। जिससे पूरे अस्पताल को पाइप लाइन के जरिए मरीज के बिस्तर पर ही ऑक्सीजन की सुविधा प्रदान की जाती है। इसमें दो कंप्रेसर लगे हुए हैं, जो रोटेशन में काम करते हैं। इन दोनों की सर्विस होनी है, जोकि बीते एक साल से नहीं हो पाई है। जिस कारण यह प्लांट पूरी तरह से बंद पड़ा है और मात्र सफेद हाथी बनकर रह गया है।
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मरीजों की सांसें खरीदने में फूंके 10 लाख
जोनल अस्पताल मंडी के एमएस डॉ। डीएस वर्मा ने बताया, "पीएसए प्लांट बंद होने के कारण हर महीने बाजार से ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदकर लाने पड़ रहे हैं। जहां हर महीने मात्र 40 से 50 सिलेंडर खरीदने पड़ते थे, वहीं अब 750 सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। इससे अस्पताल प्रबंधन को मासिक 2 लाख का अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। पीएसए प्लांट शुरू हो जाने से इस राशि की बचत होगी।"
