कांगड़ा। जब अधिकांश लोग 60-70 वर्ष की उम्र के बाद सार्वजनिक जीवन से दूरी बना लेते हैं, तब 97 वर्षीय कॉमरेड परसराम समाज के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके इरादों में वही मजबूती है- जो किसी युवा सामाजिक कार्यकर्ता में देखने को मिलती है।

 

नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को और मजबूत करने के लिए उन्होंने ग्राम पंचायत झिकला हटवास से उपप्रधान पद का चुनाव लड़ा और पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गए। हालांकि चुनावी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन उनकी सोच और समाज के प्रति समर्पण ने लोगों का दिल जरूर जीत लिया।

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आठ प्रत्याशियों के बीच हुए मुकाबले में कॉमरेड परसराम को 43 वोट मिले। भले ही यह संख्या उन्हें जीत तक नहीं पहुंचा सकी, लेकिन 97 वर्ष की उम्र में चुनाव मैदान में उतरने का उनका साहस लोगों के लिए प्रेरणा बन गया।

चुनाव हारा, लेकिन हौसला नहीं

चुनाव परिणाम आने के बाद कॉमरेड परसराम ने झिकला हटवास की जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि मतदाता परमात्मा का रूप होता है और जनता का जो फैसला है, वह उन्हें पूरी तरह स्वीकार है। उन्होंने कहा कि वह उपप्रधान का चुनाव जरूर हार गए हैं, लेकिन समाज को नशामुक्त बनाने का उनका संकल्प और जुनून आज भी पहले जैसा मजबूत है।

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नशे के खिलाफ जारी रहेगी मुहिम

कॉमरेड परसराम का कहना है कि चिट्टे और अन्य नशीले पदार्थों ने युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए, ताकि नशा तस्करों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

सरकारों से की सख्त कानून की मांग

उन्होंने कहा कि नशा केवल किसी एक पंचायत या जिले की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका नेटवर्क पूरे देश में फैल चुका है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए और कठोर कदम उठाने चाहिए। उन्होंने नशा तस्करों के खिलाफ कड़े कानून बनाने और इस अपराध पर प्रभावी रोक लगाने की मांग भी उठाई।

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बनी प्रेरणा की मिसाल

97 वर्ष की उम्र में चुनाव लड़ना और समाज के लिए सक्रिय रहना अपने आप में एक बड़ी मिसाल है। कॉमरेड परसराम ने यह साबित कर दिया कि समाज सेवा के लिए उम्र नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है। चुनावी हार उनके कदमों को रोक नहीं सकी है और नशे के खिलाफ उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहने वाली है।

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