धीरा (कांगड़ा)। वीरभूमि हिमाचल प्रदेश ने आज एक और सपूत खो दिया। भारतीय सेना में तैनात कांगड़ा जिला के लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। उनके निधन का समाचार जैसे ही परिवार को मिला, घर और पूरे गांव में मातम पसर गया। लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता इस समय अंडमान.निकोबार में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसी दौरान अचानक हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया, जिससे कांगड़ा जिला सहित पूरे हिमाचल में शोक की लहर दौड़ गई।

सात माह बाद होनी थी रिटायरमेंट

लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता कांगड़ा जिला के धीरा उपमंडल स्थित नौरा पंचायत के मतेहड़ गांव के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि सात माह बाद लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता सेवानिवृत्त होने वाले थे। जिसकी तैयारियों में परिवार पूरी तरह से जुटा हुआ था, लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था। अपनी रिटायरमेंट से मात्र सात माह पहले ही अनुपम यह दुनिया ही छोड़ गए। 

 

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गहरे सदमें में परिवार

जानकारी के मुताबिक लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता भारतीय सेना की 19 पंजाब रेजिमेंट में तैनात थे और इन दिनों अंडमान.निकोबार द्वीप समूह में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वीरवार देर रात उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गयाए जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव मतेहड़ पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातम छा गया। परिवार और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं। हर किसी की आंखें नम हैं और गांव में शोक का माहौल है।

 

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कल होगा अंतिम संस्कार

परिजनों के अनुसार शहीद जवान की पार्थिव देह शनिवार देर रात तक सेना के होल्टा कैंप पालमपुर पहुंचने की संभावना है। इसके बाद रविवार सुबह पूरे सैन्य सम्मान के साथ पार्थिव देह को उनके गांव मतेहड़ लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।

तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता के घर में बुढ़े माता पिता के अलावा पत्नी और दो बेटियां, एक बेटा है। वहीं उनके दो भाई भी हैं। लेफ्टिनेंट अनुपम मेहता के अचानक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जवान बेटे के असमय निधन से माता.पिता और परिजनों का रो.रोकर बुरा हाल है।

 

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26 जनवरी 2026 को बने थे लेफ्टिनेंट

बताया जा रहा है कि अनुपम मेहता ने वर्ष 1998 में भारतीय सेना में भर्ती होकर देशसेवा का सफर शुरू किया था। अपनी कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट सेवाओं के दम पर उन्हें इसी वर्ष 26 जनवरी को लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति मिली थी। वह 31 अक्तूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन रिटायरमेंट से करीब सात महीने पहले ही उनका निधन हो गया।

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