ऊना। उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा रुद्रानंद के अधिष्ठाता एवं वेदांताचार्य श्री श्री 1008 स्वामी सुग्रीवानंद महाराज का आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके उत्तराधिकारी एवं शिष्य हेमानंद महाराज ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनके अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
98 वर्ष की आयु में निधन
98 वर्ष की आयु में स्वामी सुग्रीवानंद महाराज ने रविवार सुबह 9 बजे पीजीआई में अंतिम सांस ली थी। सुग्रीवानंद महाराज का पार्थिव शरीर आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। डेरा परिसर में बेहद गमगीन माहौल के बीच हजारों लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए।
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डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने दी श्रद्धांजलि
सुग्रीवानंद महाराज की अंतिम विदाई में हिमाचल के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री भी मौजूद रहे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, महाराज जी का जाना एक बहुत बड़ी क्षति है। मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे हमारा जिला अनाथ हो गया है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि महाराज जी ने जीवनपर्यंत धर्म, सेवा और सद्भाव के प्रकाश को फैलाने का काम किया। उन्होंने समाज को आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत डोर में बांधने का संदेश दिया। महाराज जी ने जीवन भर सनातन धर्म, वेदांत और मानव सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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सरकार ने राजकीय शोक की घोषणा की
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुग्रीवानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने पर राजकीय शोक की घोषणा की। दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने भी उनके सम्मान में सोमवार को स्थानीय अवकाश घोषित किया। इतना ही नहीं व्यापार क्षेत्र के तमाम संगठनों ने भी सोमवार को व्यापार जगत से अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने का आह्वान किया था।
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1952 में बनाया था डेरा का उत्तराधिकारी
बताया जा रहा है कि सुग्रीवानंद महाराज को उनके गुरु श्री श्री 1008 आत्मानंद महाराज ने 1952 में उत्तराधिकारी बनाया था। तब से सुग्रीवानंद महाराज डेरा बाबा रुद्रानंद के अधिष्ठाता रहे और 72 साल तक इन्होंने डेरा प्रमुख के तौर पर सेवाएं दी। सुग्रीवानंद महाराज की बीते बुधवार को तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया। जहां पर उन्होंने रविवार सुबह अंतिम सांस ली।
