कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले में शनिवार को एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई। शाहपुर की 30 वर्षीय रितु देवी को जब सुबह 11 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो परिजनों ने उन्हें तुरंत लपियाना से शाहपुर सिविल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
EMT हिमानी ने एंबुलेंस में करवाई डिलीवरी
108 एम्बुलेंस सेवा की टीम, जिसमें EMT हिमानी और ड्राइवर कुलविंदर शामिल थे, महिला को टांडा लेकर जा रही थी। लेकिन जैसे ही एम्बुलेंस गग्गल के पास पहुंची, रितु देवी की पीड़ा असहनीय हो गई। हालात को समझते हुए EMT हिमानी ने बिना समय गंवाए एम्बुलेंस में ही डिलीवरी करवाई।
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नवजात बेटी और मां दोनों सुरक्षित
कुछ ही देर में एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ। इसके बाद दोनों को टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर है। जिला 108 सेवा प्रभारी ईशान राणा ने EMT हिमानी और ड्राइवर कुलविंदर की हिम्मत, सतर्कता और प्रशिक्षण की प्रशंसा की।
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धर्मशाला में भी पेश आया ऐसा मामला
यह कोई पहला मामला नहीं है। धर्मशाला में भी कुछ समय पहले एक महिला को जोनल अस्पताल से टांडा रेफर किया गया था। रास्ते में, एजुकेशन बोर्ड धर्मशाला के पास महिला की स्थिति बिगड़ गई। वहां भी 108 स्टाफ ने एम्बुलेंस में सुरक्षित डिलीवरी करवाई थी।
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108 सेवा बनी मातृत्व की रक्षक
इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 108 एम्बुलेंस सेवा केवल आपातकालीन सहायता नहीं, बल्कि मां और नवजात के लिए जीवन की डोर बन चुकी है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद 108 स्टाफ की प्रशिक्षण, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सराहनीय है।
