कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में हुई गंभीर घटना के बाद अब श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के सामान से लेकर प्रवेश और निकासी मार्गों तक, सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

ज्वालामुखी मंदिर में बढ़ेगी सुरक्षा

प्रशासन अब ऐसी किसी भी घटना की आशंका को पहले ही रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है। घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।

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कारण बताओ नोटिस जारी

मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने सुरक्षा इंचार्ज को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि मंदिर परिसर में घटना किन परिस्थितियों में हुई और मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इसे समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका।

बैग और पानी की बोतल ले जाने पर रोक

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन श्रद्धालुओं के सामान को लेकर भी नई व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत मंदिर परिसर के अंदर बैग, पानी की बोतल और अन्य सामान ले जाने पर रोक लगाई जा सकती है।

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कहां तक ले जा सकेंगे सामान?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले अपना सामान उसी स्थान पर रखना होगा, जहां जूते-चप्पल उतारे जाते हैं। हालांकि अभी यह फैसला अंतिम नहीं हुआ है। मंदिर न्यास की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी और इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रवेश और निकासी मार्गों पर भी बढ़ेगी निगरानी

प्रशासन सिर्फ श्रद्धालुओं के सामान की जांच तक सुरक्षा को सीमित रखने के पक्ष में नहीं है। मंदिर के अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। 

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श्रद्धालुों पर पूरी निगरानी

इसके तहत मंदिर परिसर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं पर निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पहचानने और किसी भी असामान्य स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया जाएगा। घटना के बाद मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने एसडीएम ज्वालामुखी डॉ. संजीव शर्मा के साथ भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की है।

17 सितंबर की घटना के बाद लिया जा रहा फैसला

दरअसल, 17 सितंबर की शाम मंदिर परिसर में राजस्थान से आए एक श्रद्धालु ने खुद को आग लगा ली थी। घटना गर्भगृह के बाहर पीपल के पास हुई थी। श्रद्धालु आग की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गया था।

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युवक ने खुद को लगाई आग

मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई और श्रद्धालु को उपचार के लिए ज्वालामुखी अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान 18 सितंबर को उसकी मौत हो गई।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा का ध्यान

पुलिस इस घटना के कारणों की जांच कर रही है। वहीं, घटना के बाद मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे कदमों का उद्देश्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है।

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