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September 20, 2026

हिमाचल के 4 जिले बने नशे के हॉटस्पॉट- धड़ल्ले से हो रही सप्लाई, अलर्ट पर पुलिस

ड्रग तस्करी के हॉटस्पॉट बने 4 जिले

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शिमला। हिमाचल में नशे के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है, लेकिन पहाड़ के कुछ हिस्सों में चुनौती अब भी बनी हुई है। दूसरे राज्यों से जुड़ी सीमाएं, लगातार बढ़ती आवाजाही और कुछ इलाकों में सामने आ रहे नशे से जुड़े मामले सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। ऐसे में अब कुछ जिलों को लेकर निगरानी और सख्त करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

ये 4 जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील

इसी बीच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB के आकलन में हिमाचल प्रदेश के चार जिलों को देशभर के 274 ड्रग प्रभावित संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इनमें कुल्लू, सोलन, सिरमौर और मंडी शामिल हैं। इन जिलों में नशे की तस्करी और खपत से जुड़े जोखिम को देखते हुए लगातार निगरानी रखने की हिदायत दी गई है।

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इन जिलों से भारी मात्रा में पकड़ा गया नशा

इन जिलों को संवेदनशील श्रेणी में शामिल करने के पीछे केवल नशे की बरामदगी के आंकड़ों को आधार नहीं बनाया गया है। दर्ज मामलों, गिरफ्तारियों, स्थानीय स्तर से मिली सूचनाओं और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड समेत कई पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। यानी किसी जिले में कितनी मात्रा में नशा पकड़ा गया, यह अकेला आधार नहीं है। स्थानीय स्तर पर नशे से जुड़े नेटवर्क और उसकी गतिविधियों को भी आकलन में शामिल किया गया है।

सोलन में बद्दी और दूसरे राज्यों की आवाजाही चुनौती

सोलन की स्थिति को लेकर इसकी भौगोलिक स्थिति महत्वपूर्ण मानी गई है। जिला हरियाणा और पंजाब के नजदीक है और बद्दी क्षेत्र में बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी मौजूद है। दूसरे राज्यों से लगातार होने वाली आवाजाही के कारण सोलन-बद्दी क्षेत्र को नशे की तस्करी के संभावित ट्रांजिट रूट के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में यहां ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

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सिरमौर में कालाअंब-पांवटा साहिब पर नजर

सिरमौर भी संवेदनशील जिलों में शामिल है। जिले की सीमा उत्तराखंड से लगती है और कई प्रमुख रास्ते दूसरे राज्यों को जोड़ते हैं। कालाअंब और पांवटा साहिब क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन की शिकायतों के साथ सिंथेटिक नशे की तस्करी पर भी नजर बढ़ाने की बात कही गई है। दूसरे राज्यों से जुड़ी आवाजाही के कारण इन क्षेत्रों को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत बताई गई है।

कुल्लू में चरस तस्करी बनी चिंता

कुल्लू को खासतौर पर चरस तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। जिले में नशे से जुड़े मामले पहले भी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने आते रहे हैं।

कुल्लू की भौगोलिक परिस्थितियां और दूरदराज के इलाके भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती माने जाते हैं। ऐसे में नशे की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई गई है।

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मंडी भी संवेदनशील जिलों की सूची में

मंडी को भी इस सूची में शामिल किया गया है। जिले में नशे की तस्करी और खपत से जुड़े जोखिम को देखते हुए निगरानी मजबूत करने की बात कही गई है।

वहीं बिलासपुर और कांगड़ा को संवेदनशील जिलों की सूची में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन इन दोनों जिलों में भी एहतियाती कदम उठाने और नशे से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने का सुझाव दिया गया है।

पंचायतों को भी निगरानी से जोड़ने की तैयारी

नशे के खिलाफ अभियान को सिर्फ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए पंचायतों को भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने और संबंधित एजेंसियों तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया है।फोकस बड़े तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ उन स्थानीय इलाकों में निगरानी मजबूत करने पर है- जहां नशे की तस्करी और खपत का जोखिम अधिक माना जा रहा है।

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