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September 17, 2026

गुटखा-खैनी से लेकर सिगरेट तक… हिमाचल में फैल रहा नशे का जाल, कैंसर मरीजों की बढ़ी संख्या

हिमाचल के शहरों में तंबाकू पर खर्च भी ज्यादा

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Cancer Patients IGMC Shimla

शिमला। हिमाचल प्रदेश की साफ आबोहवा और पहाड़ी जीवनशैली के बीच तंबाकू की लत एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। सिगरेट और बीड़ी से लेकर गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल लोगों को कई गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आंकड़े जहां राज्य में तंबाकू सेवन की मौजूदगी दिखाते हैं, वहीं IGMC शिमला में कैंसर मरीजों से जुड़ी जानकारी इस समस्या के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को सामने रखती है।

हिमाचल में 28.9% पुरुष करते हैं तंबाकू का सेवन

NFHS-6 (2023-24) के आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 28.9 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 29.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 24.6 प्रतिशत बताया गया है। महिलाओं में तंबाकू सेवन का स्तर 1.9 प्रतिशत दर्ज किया गया है। पिछले सर्वेक्षण NFHS-5 में पुरुषों के बीच यह आंकड़ा 32.2 प्रतिशत था। यानी पुरुषों में कुछ कमी जरूर दर्ज हुई है, लेकिन करीब तीन में से एक पुरुष का तंबाकू सेवन से जुड़ा होना अब भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।

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प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान IGMC शिमला में हर वर्ष करीब 2200 से 2500 नए कैंसर मरीज पंजीकृत होने की जानकारी सामने आई है। कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल की कैंसर ओपीडी में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनकी तंबाकू या धूम्रपान की हिस्ट्री मिलती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फेफड़ों का कैंसर हिमाचल में प्रमुख चिंता बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सालाना करीब 350 से 400 लंग कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत पुरुष और 10 प्रतिशत महिलाएं बताई गई हैं।

महिलाओं में भी बढ़ रही चिंता

 

सिर्फ सिगरेट को ही तंबाकू से जुड़ी बीमारी का कारण मानना सही नहीं है। खैनी, गुटखा और दूसरे धूम्ररहित तंबाकू उत्पाद भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं। IGMC से जुड़े विशेषज्ञ के अनुसार, कैंसर ओपीडी के करीब 20 से 30 प्रतिशत मरीज खैनी, गुटखा या चबाने वाले तंबाकू के सेवन की जानकारी देते हैं। WHO के अनुसार, भारत में खैनी, गुटखा, तंबाकू वाला पान और जर्दा जैसे धूम्ररहित तंबाकू उत्पाद व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं और तंबाकू कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख जोखिम कारक है।

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IGMC के आंकड़ों में महिलाओं में कैंसर के बदलते पैटर्न की तस्वीर भी सामने आती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हर साल करीब 170 से 200 नए ब्रेस्ट कैंसर के मामले दर्ज होते हैं, जबकि सर्वाइकल कैंसर के करीब 150 से 175 नए मामले सामने आते हैं। चिंता की एक और वजह महिलाओं में धूम्रपान की हिस्ट्री का सामने आना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से ऐसी महिलाएं इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं, जिनमें धूम्रपान या तंबाकू सेवन का इतिहास पाया गया है।

हिमाचल के शहरों में तंबाकू पर खर्च भी ज्यादा

MoSPI के HCES 2023-24 के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में ‘pan, tobacco & intoxicants’ श्रेणी में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च ₹313.94 दर्ज हुआ। आधिकारिक तालिका में यह आंकड़ा इस व्यापक श्रेणी के तहत दिया गया है, इसलिए इसे केवल तंबाकू पर खर्च के रूप में पढ़ना उचित नहीं होगा। ग्रामीण हिमाचल में इसी श्रेणी का प्रति व्यक्ति मासिक खर्च करीब ₹156.31 बताया गया है।

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WHO के अनुसार, तंबाकू सेवन से दुनिया में हर साल 70 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। इनमें सेकेंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आने वाले गैर-धूम्रपान करने वाले लोग भी शामिल हैं। भारत में तंबाकू से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी मौतों का अनुमान करीब 13.5 लाख प्रतिवर्ष है। तंबाकू फेफड़ों, हृदय और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के साथ 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। WHO यह भी स्पष्ट करता है कि तंबाकू का कोई भी रूप पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

नियंत्रण कार्यक्रम पर भी सरकार का फोकस

तंबाकू की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चला रही है। साथ ही तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन 1800-11-2356 पर परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। हिमाचल में कैंसर मरीजों के उपचार और सहायता के लिए IGMC के कैंसर केयर सेंटर की भूमिका महत्वपूर्ण है। आंकड़े एक बात साफ करते हैं कि तंबाकू की आदत सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य का सवाल नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति और पूरे समाज पर असर डालने वाली समस्या है।

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