सोलन। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से शादी कर हिमाचल में बस चुकी कई महिलाओं के नामांकन रद्द किए जाने के बाद स्थानीय लोगों और महिलाओं में भारी नाराजगी देखने को मिली है। चुनाव अधिकारियों ने आरक्षित श्रेणी से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए इन महिलाओं को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
चुनाव लड़ने से रोकना अन्यायपूर्ण
मिली जानकारी के अनुसार, मामला सोलन जिले के नालागढ़ क्षेत्र से सामने आया है। यहां गांव दबोटा के शिव मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण एकत्रित हुए और सरकार व चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो महिलाएं वर्षों से हिमाचल में रह रही हैं, जिनके सभी सरकारी दस्तावेज और मतदाता पहचान पत्र प्रदेश के हैं, उन्हें बाहरी राज्य की महिला बताकर चुनाव लड़ने से रोकना अन्यायपूर्ण है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बातें तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।
नियमित रूप से करती हैं मतदान
कई महिलाओं ने कहा कि वे पिछले कई दशकों से हिमाचल में रह रही हैं और नियमित रूप से मतदान भी करती हैं, ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित करना समझ से परे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला अब सिर्फ पंचायत चुनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के अधिकार और पहचान से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
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प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो प्रदेशभर में आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा। साथ ही इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया है।
