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May 13, 2026
हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- आपसी समझौते के बाद भी बंद नहीं होगा केस, जानें क्यों
आरोपियों को नहीं चुनौती देने का अधिकार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि, अब केवल आपसी समझौते के आधार पर हर केस वापस नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा कि मुकदमा वापसी अभियोजन पक्ष और कोर्ट के बीच का विषय है, इसलिए आरोपी पक्ष को केस वापस लेने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
दरअसल, यह फैसला न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की अदालत ने सुनाया। कोर्ट ने आरोपी सुनीता देवी और अन्य की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने का अधिकार आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। मामला बिलासपुर जिले से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ओम प्रकाश अदालत में प्रोसेस सर्वर के रूप में कार्यरत थे।
वर्ष 2021 में वह एक दीवानी मामले में समन देने के लिए बरमाणा क्षेत्र पहुंचे थे। आरोप है कि समन देने के दौरान विवाद हुआ और शिकायतकर्ता को घर के अंदर रोककर उसके साथ मारपीट तथा धमकी दी गई। बाद में पुलिस की मदद से उसे बाहर निकाला गया।
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा, बंधक बनाने और धमकी देने जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और केस वापस लेने के लिए निचली अदालत में आवेदन दायर किया गया। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने यह आवेदन खारिज कर दिया।
इसके बाद आरोपी पक्ष हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मुकदमा वापस लेने का निर्णय अभियोजन और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। आरोपी इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर आदेश को चुनौती नहीं दे सकते। कानूनी जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट की यह व्यवस्था भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल मानी जा रही है।