धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम इलाकों में गिने जाने वाले बड़ा भंगाल में करीब 14 वर्षों बाद किसी मुख्यमंत्री का दौरा हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दो दिवसीय प्रवास पर यहां पहुंचे हैं, जहां वे आपदा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की समस्याएं भी सुनेंगे। सड़क सुविधा से वंचित इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक और विकासात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपातकालीन संपर्क के लिए सैटेलाइट फोन का सहारा
दरअसल, बड़ा भंगाल जिला कांगड़ा का ऐसा इलाका है, जहां आज भी सड़क संपर्क नहीं है। यहां पहुंचने के लिए लोगों को घंटों कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल सफर करना पड़ता है। संचार व्यवस्था भी बेहद सीमित है और अधिकांश स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। आपातकालीन संपर्क के लिए केवल सैटेलाइट फोन का सहारा लिया जाता है।
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मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर के माध्यम से गगल से बड़ा भंगाल पहुंचे। वहां से उन्होंने पैदल वन विश्राम गृह तक का सफर तय किया। अपने दौरे के दौरान वे हाल ही में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याओं, जरूरतों और सुझावों को भी सुनेंगे।
वास्तविक परिस्थितियों को जानने के लिए पहुंचे सीएम
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अपर बड़ा भंगाल स्थित माइक्रो हाइडल परियोजना का निरीक्षण भी करेंगे। साथ ही क्षेत्र में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मौजूदा स्थिति का आकलन करेंगे। मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों के साथ सीधा संवाद कर विकास कार्यों को लेकर उनकी प्राथमिकताओं को समझने का प्रयास करेंगे।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बड़ा भंगाल का यह उनका पहला दौरा है। उनका मानना है कि दुर्गम क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को केवल फाइलों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। सरकार की कोशिश है कि वह ऐसे क्षेत्रों में स्वयं पहुंचकर लोगों की समस्याओं को जाने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
रात्रि विश्राम भी बड़ा भंगाल में
मुख्यमंत्री का रात्रि विश्राम भी बड़ा भंगाल में ही निर्धारित है। अगले दिन वे हेलीकॉप्टर के माध्यम से वापस गगल पहुंचेंगे और वहां से शिमला रवाना होंगे। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं और राहत कार्यों को लेकर विस्तृत समीक्षा भी की जाएगी।
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स्थानीय लोगों का मानना है कि लंबे समय बाद किसी मुख्यमंत्री के क्षेत्र में पहुंचने से विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। खासकर आपदा के बाद पुनर्वास, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं और संचार व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लगभग 600 की आबादी वाले इस गांव में एक सरकारी स्कूल और एक छोटा अस्पताल तो है, लेकिन सुविधाओं की कमी आज भी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
