शिमला। हिमाचल प्रदेश में रोजगार को लेकर एक बार फिर सियासी बहस छिड़ गई है। 2022 विधानसभा चुनाव से पहले पांच साल में पांच लाख नौकरियां देने का वादा करने वाली कांग्रेस सरकार अब सत्ता में आने के बाद अलग-अलग नामों से आउटसोर्स भर्तियों पर जोर देती नजर आ रही है। कभी पशु मित्र, कभी वन मित्र, बिजली मित्र और रोगी मित्र के बाद अब सुक्खू सरकार ने ‘श्रमिक मित्र’ भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है।

आउटसोर्स आधार पर होगी भर्ती

भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की हाल ही में हुई बैठक में 100 ‘श्रमिक मित्र’ को आउटसोर्स आधार पर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है। इनकी नियुक्ति का उद्देश्य पंजीकृत श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उनकी समस्याओं का समाधान करना बताया जा रहा है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: ट्रांसपोर्टर की हड़ताल ने बिगाड़े हालात, वाहनों के थमे पहिये; लोगों को झेलनी पड़ी परेशानी

युवाओं की स्थायी नौकरी पर उठे सवाल

सरकार के इस फैसले के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्रदेश के युवाओं को स्थायी रोजगार के बजाय अस्थायी और आउटसोर्स नौकरियों तक सीमित किया जा रहा है। विपक्ष और बेरोजगार युवा पहले ही इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं और अब ‘श्रमिक मित्र’ भर्ती ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

बजट और योजनाओं को मिली मंजूरी

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 211.47 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट को मंजूरी दी गई। इसमें से 105 करोड़ रुपये विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत पंजीकृत श्रमिकों के हित में खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि श्रमिकों और उनके परिवारों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

 

यह भी पढ़ें : पंचायत चुनाव से पहले सुक्खू सरकार को हाईकोर्ट का झटका, डीसी के 5% आरक्षण अधिकार पर लगाई रोक

श्रमिकों के लिए नई पहलें

बोर्ड ने श्रमिकों को जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों पर भी जोर देने का निर्णय लिया है। साथ ही सभी पात्र लाभार्थियों को हिमकेयर योजना से जोड़ने और पेंशन योजनाओं को ई-प्रणाली के साथ एकीकृत करने का फैसला लिया गया है, जिससे पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल पंचायत चुनाव: सबसे बड़े जिला का रोस्टर जारी, 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

हमीरपुर में बनेगा नया मुख्यालय

बैठक में यह भी तय किया गया कि बोर्ड का मुख्यालय पुराने एसडीएम कार्यालय से हटाकर हमीरपुर के नए बस स्टैंड के पास निर्माणाधीन भवन में स्थानांतरित किया जाएगा।

सरकार का तर्क और बढ़ती बहस

सरकार का कहना है कि इन कदमों से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच मजबूत होगी और सेवाओं में सुधार आएगा। वहीं दूसरी ओर, युवाओं का एक वर्ग इसे स्थायी नौकरियों से दूरी और आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ावा देने के रूप में देख रहा है। कुल मिलाकर, ‘श्रमिक मित्र’ भर्ती का यह फैसला एक तरफ जहां श्रमिक कल्याण की दिशा में कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह प्रदेश में रोजगार के मुद्दे को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें