शिमला। सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी सक्रियता और फिटनेस पोस्ट को लेकर चर्चा में रहने वाली हिमाचल प्रदेश की एचएएस अधिकारी ओशिन शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार वजह कोई प्रशासनिक फैसला या जनसुनवाई नहीं, बल्कि उनका सोशल मीडिया पर साझा किया गया एक वीडियो है, जिसने नई बहस को जन्म दे दिया है। प्रशासनिक जिम्मेदारी के अहम पद पर तैनात यह अधिकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक निजी कंपनी के उत्पादों को प्रमोट करती हुई नजर आईं, जिसके बाद लोगों के बीच सवालों का दौर शुरू हो गया है।

सोशल मीडिया पर प्रोटीन पाउडर को कर रही प्रमोट

दरअसल ओशिन शर्मा शिमला अर्बन की एसडीएम हैं। एचएएस अधिकारी ओशिन शर्मा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है। वो अक्सर अपने जिम वर्कआउट की तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया पेज पर शेयर करती रहती हैं। लेकिन इस बार ओशिन शर्मा ने जो  वीडियो अपने सोशल मीडिया पर अपलोड किया है, जिसमें वह एक प्रोटीन पाउडर के कुछ प्रोडक्ट्स को प्रमोट करते हुए दिख रही है। अपने इस वीडियो के चलते जब वह सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल होने लगी तो उन्होंने फेसबुक से यह वीडियो डिलीट कर दिया, लेकिन इंस्टाग्राफ पर यह वीडियो अभी भी चल रहा है और इस पर लोग तरह तरह के कमेंट्स कर रहे हैं।

 

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वीडियो बना विवाद की वजह

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में एसडीएम ओशिन शर्मा एक पार्सल खोलते हुए दिखाई देती हैं और उसमें मौजूद फिटनेस सप्लीमेंट उत्पादों को कैमरे के सामने विस्तार से दिखाती हैं। वीडियो का प्रस्तुतिकरण बिल्कुल किसी प्रमोशनल या विज्ञापन शैली जैसा नजर आ रहा है।

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पोस्ट में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्हें कंपनी का पहला पार्सल प्राप्त हुआ है और साथ ही एक डिस्काउंट कोड भी साझा किया गया, जिससे यूजर्स को खरीदारी पर छूट मिल सकती है। यही पहलू सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा और विवाद का मुख्य कारण बन गया।

पेड प्रमोशन के लगे आरोप

वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाते हुए इसे संभावित पेड प्रमोशन करार दिया। लोगों का कहना है कि जिस अंदाज में उत्पाद पेश किए गए, उससे ऐसा प्रतीत होता है मानो यह किसी व्यावसायिक प्रचार अभियान का हिस्सा हो। कुछ यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि संवैधानिक और प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारियों को निजी कंपनियों के प्रचार से दूरी बनाए रखनी चाहिए, जबकि कई लोगों ने व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के जरिए सरकारी अधिकारियों की सोशल मीडिया भूमिका पर भी सवाल उठाए।

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सेवा आचरण नियमों को लेकर छिड़ी बहस

वीडियो में दिखाए गए उत्पाद ‘Corebolics’ ब्रांड से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1974 का हवाला देते हुए बहस और तेज हो गई। कुछ यूजर्स का दावा है कि सरकारी अधिकारी बिना अनुमति किसी व्यावसायिक गतिविधि या ब्रांड समर्थन से नहीं जुड़ सकते। हालांकि अब तक इस पूरे मामले पर प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

निजी पोस्ट या पद की गरिमा का सवाल?

यह पहली बार नहीं है जब किसी प्रशासनिक अधिकारी की सोशल मीडिया गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हों, लेकिन इस मामले में विवाद इसलिए गहरा गया है क्योंकि वीडियो में उत्पादों को पेश करने का तरीका पेशेवर विज्ञापन जैसा दिखाई दे रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह केवल एक निजी सोशल मीडिया पोस्ट थी या फिर इसे सरकारी पद की गरिमा और सेवा नियमों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

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साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि यह प्रमोशनल गतिविधि थी, तो क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी। फिलहाल, सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और एचएएस अधिकारी ओशिन शर्मा एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गई हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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