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April 11, 2026
हिमाचल पंचायत चुनाव : रोस्टर बदलने पर 'नो टेंशन' अब दूसरी जगह से इलेक्शन लड़ सकेंगे प्रत्याशी- जानें
जिले के किसी भी वार्ड से लड़ सकते हैं जिला परिषद चुनाव
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों से पहले बीडीसी यानी पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं को बड़ी राहत भारी खबर सामने आई है। जिससे कई दावेदारों के लिए नए विकल्प खुल गए हैं। अब नए नियमों के तहत यदि किसी उम्मीदवार की सीट आरक्षित हो जाती है, तो वह दूसरे वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है।
नए नियमों के अनुसार, जिला परिषद का चुनाव पूरे जिले के किसी भी वार्ड से लड़ा जा सकता है, जबकि बीडीसी चुनाव संबंधित ब्लॉक के किसी भी वार्ड से लड़ने की अनुमति देता है। यानी आरक्षण के बाद उम्मीदवारों को अपनी राजनीतिक रणनीति बदलने का अवसर मिलता है।
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हालांकि यह छूट सभी पदों के लिए लागू नहीं है। पंचायतीराज व्यवस्था के तहत प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्य केवल अपनी ही पंचायत से चुनाव लड़ सकते हैं। इन पदों के लिए क्षेत्र बदलने की अनुमति नहीं दी गई है, जिससे स्थानीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।
दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को कुछ शर्तें भी पूरी करनी होती हैं। सबसे पहले उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है। इसके अलावा, जिस वार्ड से वह चुनाव लड़ना चाहता है, वहां नामांकन के समय एक प्रस्तावक होना भी अनिवार्य है। इन शर्तों के पूरा होने पर ही उम्मीदवार को दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ने की अनुमति मिलती है।
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पंचायत चुनावों के लिए जारी आरक्षण रोस्टर ने प्रदेश की राजनीति का समीकरण बदल दिया है। महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने के चलते कुल मिलाकर लगभग 55 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो गई हैं, जबकि सामान्य और पुरुष वर्ग के लिए केवल 45 प्रतिशत सीटें बची हैं। इससे कई नेताओं की चुनावी योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
आरक्षण के चलते एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है, जहां कई पुरुष उम्मीदवार अपनी सीट आरक्षित होने के बाद अपनी पत्नी या परिवार की महिला सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
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वहीं, कुछ नेता अब दूसरे वार्ड से किस्मत आजमाने की रणनीति बना रहे हैं। पंचायतीराज कानून के तहत शहरी निकायों से जुड़े मतदाताओं पर भी प्रतिबंध है। नगर निगम या नगर परिषद के मतदाता जिला परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकते। इसी तरह, किसी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले शहरी क्षेत्र के मतदाता बीडीसी चुनाव के लिए भी पात्र नहीं होते।
गौरतलब है कि, प्रदेश की 3755 पंचायतों में चुनाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 31 मई से पहले कराए जाने हैं। 7 अप्रैल को सभी जिलों में आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ऐसे में जहां आरक्षण ने कई समीकरण बिगाड़े हैं, वहीं बीडीसी और जिप चुनाव के लिए वार्ड बदलने की छूट ने नेताओं के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे भी खोल दिए हैं।