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April 10, 2026
हिमाचल : 10 दिन बाद आना था छुट्टी, घर पहुंची फौजी की देह- 6 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि
परिवार ने छिन गया इकलौता सहारा, बूढ़ी मां का रो-रो कर बुरा हाल
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। लडभड़ोल के ऊटपरु गांव के वीर जवान सिद्धांत कुमार राणा (शालू) का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया है। सिद्धांत कुमार के अचानक हुए निधन की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
सिद्धांत अपने परिवार का इकलौता सहारा थे। सबसे ज्यादा भावुक पल तब आया जब उनके 6 वर्षीय बेटे अरमान ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। एक मासूम का दर्द देख वहां मौजूद हर शख्स के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
जानकारी के अनुसार, नायक सिद्धांत कुमार राणा (शालू) की महाराष्ट्र के अहमदनगर में कल सुबह करीब 8 बजे हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। इस अचानक आई खबर ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।
सिद्धांत कुमार राणा महज 34 वर्ष के थे और वर्ष 2012 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। अपनी मेहनत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर उन्होंने सेना में एक सम्मानजनक पहचान बनाई थी। वर्तमान में वे अहमदनगर में तैनात थे और वहीं अपने परिवार के साथ रह रहे थे।
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बताया जा रहा है कि वे 20 अप्रैल को छुट्टी लेकर अपने घर आने वाले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सिद्धांत अपने घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी मधु राणा, वृद्ध माता सुशीला देवी और दो छोटे बेटे हैं।

सिद्धांत का बड़ा बेटा अरमान 6 साल का है और छोटा बेटा अहान अभी डेढ़ साल का ही है। सिद्धांत के निधन से परिवार के सिर से सहारे की छाया उठ गई है। जैसे ही उनके निधन की सूचना पैतृक गांव ऊटपुर पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। गांव में हर तरफ सन्नाटा पसर गया और लोगों की आंखें नम हो गईं।
शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया, तो अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। हर कोई अपने वीर सपूत को आखिरी विदाई देने के लिए बेकरार नजर आया।

इस दौरान 'भारत माता की जय' और 'सिद्धांत कुमार राणा अमर रहें' के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। पत्नी मधु राणा ने भारी मन और नम आंखों से अपने पति को अंतिम विदाई दी। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
त्रिवेणी श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। भारतीय सेना की टुकड़ी ने शस्त्र उल्टे कर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया।