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April 9, 2026
कैसे भरेगा सुक्खू सरकार का खाली खजाना, शराब ठेकों से दूर भाग रहे कारोबारी; 100 से अधिक पर लटके ताले
हिमाचल के शिमला और मंडी में 100 से अधिक शराब ठेकों पर लटके ताले
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में खाली खजाने को भरने के लिए सुक्खू सरकार ने शराब ठेकों की नीलामी के जरिए राजस्व बढ़ाने की बड़ी योजना बनाई थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। बढ़ी हुई बेस प्राइस के चलते कारोबारी इस बार ठेकों में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जिसके कारण शिमला और मंडी जैसे जिलों में 100 से ज्यादा शराब ठेके अब भी बंद पड़े हैं।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए आबकारी नीति के तहत शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी। लक्ष्य था कि इससे हजारों करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जा सके, लेकिन नीलामी के बाद भी कई ठेके खाली रह गए हैं। शिमला जिले के करीब 80 और मंडी के लगभग 20 ठेके अब भी आवंटन से बाहर हैं, जिससे विभाग की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
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इस बार सरकार ने शराब ठेकों के बेस प्राइस में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। यही फैसला अब कारोबारियों के पीछे हटने की मुख्य वजह माना जा रहा है। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि बढ़ी हुई कीमतों के मुकाबले बिक्री का अनुमान संतुलित नहीं बैठ रहा, जिससे उन्हें मुनाफा कम होने का खतरा है। ऐसे में कई कारोबारी जोखिम लेने से बच रहे हैं।
आबकारी विभाग के अनुसार प्रदेश के कुल 2125 ठेकों में से 2018 ठेकों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जो लगभग 95 प्रतिशत लक्ष्य को दर्शाता है। बावजूद इसके शेष ठेकों के लिए बार-बार निविदाएं जारी करने के बाद भी इच्छुक खरीदार सामने नहीं आ रहे हैं, जिससे विभाग के सामने शेष ठेकों का आवंटन एक चुनौती बन गया है।
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जहां शिमला और मंडी में स्थानीय कारोबारी पीछे हट रहे हैं, वहीं कुल्लू और लाहौल-स्पीति में स्थिति अलग नजर आई। इन क्षेत्रों के सभी ठेके एक बाहरी कंपनी ने अपने नाम कर लिए हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि स्थानीय स्तर पर हिचकिचाहट है, जबकि बाहरी निवेशक अवसर तलाश रहे हैं।
शेष बचे ठेकों को भरने के लिए आबकारी विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। विभाग रोजाना ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित कर रहा है और उम्मीद जता रहा है कि जल्द ही इन ठेकों का आवंटन पूरा कर लिया जाएगा, ताकि नई वित्तीय व्यवस्था बिना बाधा के शुरू हो सके।
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सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए शराब ठेकों की नीलामी से करीब 2900 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के लगभग 2800 करोड़ से अधिक है। हालांकि, ठेकों के खाली रहने से इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
इस बार सरकार ने पिछले वर्षों की तरह पुराने ठेकेदारों को अतिरिक्त समय देने का फैसला नहीं लिया है। साथ ही सरकारी उपक्रमों को भी ठेके आवंटित नहीं किए गए हैं। इस बदलाव ने भी कारोबारियों के निर्णय को प्रभावित किया है और नीलामी प्रक्रिया पर इसका असर देखने को मिल रहा है।