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April 12, 2026

हिमाचल में मौसम का कहर शुरू: खेती-बागवानी पर टूटने वाला है बड़ा संकट, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

हिमाचल में पिछले 40 सालों का रिकोर्ड

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 Weather Change

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम का मिजाज अब तेजी से बदल रहा है। जिन इलाकों में पहले ठंडे मौसम में उगने वाली सब्जियां खूब होती थीं, वहां अब बढ़ती गर्मी का असर साफ दिखने लगा है। इसका सीधा असर किसानों और बागवानों की आजीविका पर पड़ रहा है।

 

डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के लंबे समय तक की गई एक स्टडी में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि बदलते मौसम के कारण खेती का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिसने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

दिन ही नहीं रातें भी गर्म 

बता दें कि यह स्टडी 1984 से 2023 के बीच की है, जिसे पर्यावरण विज्ञान विभाग की निगरानी में किया गया। रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान अधिकतम तापमान करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी करीब 0.55 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। यानी दिन ही नहीं, रातें भी अब पहले से ज्यादा गर्म हो रही हैं।

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धीरे-धीरे बढ़ रही है गर्मियां 

सबसे चिंता की बात यह है कि हीट वेव यानी लू जैसी स्थिति हर साल बढ़ती जा रही है। औसतन इसमें हर साल करीब 1.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। इसके उलट कोल्ड वेव ( ठंडी लहरों) में हर साल लगभग 2.86 प्रतिशत की कमी आ रही है। मतलब साफ है कि हिमाचल की पारंपरिक ठंड अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है और गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है।

हिमाचल में पिछले 40 सालों का रिकोर्ड

अगर पिछले 40 सालों के आंकड़े देखें तो इस दौरान 669 हीट वेव और 161 गंभीर हीट वेव दर्ज की गई हैं, जबकि 260 कोल्ड वेव और 37 गंभीर कोल्ड वेव सामने आई हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि मौसम का संतुलन अब बिगड़ने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती गर्मी का असर टमाटर और शिमला मिर्च जैसी संवेदनशील फसलों पर तो साफ दिखाई दे रहा है। अधिक हीट वेव के दौरान इन फसलों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सामान्य मौसम में उत्पादन बेहतर रहा।

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 सिंचाई और पानी के स्रोतों पर पड़ेगा असर 

तापमान बढ़ने का असर सिर्फ फसल के उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि उसकी पूरी बढ़ने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। पौधों में फूल और फल ठीक से नहीं बन पा रहे हैं। ऊपर से गर्मी ज्यादा होने के कारण पानी भी जल्दी सूख रहा है, जिससे खेतों में पहले से ज्यादा पानी की जरूरत पड़ रही है। इसका सीधा दबाव सिंचाई और पानी के स्रोतों पर पड़ रहा है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ रही है।

समाधान के लिए सुझाए गए कदम 

अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया है कि ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जाए जो मौसम के बदलाव को झेल सकें। सिंचाई की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, समय पर मौसम की चेतावनी देने वाला सिस्टम लगाया जाए और क्लाइमेट-स्मार्ट खेती अपनाई जाए, ताकि किसान बदलते मौसम के साथ बेहतर तरीके से तालमेल बैठा सकें।

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