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February 26, 2026
सुक्खू सरकार ने फैंसी नंबर बेच कमाए करोड़ों- 20 लाख से ज्यादा में बिका 0001, जानें
केंद्र से हिमाचल परिवहन विभाग को 93 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब गाड़ियों के साथ-साथ फैंसी नंबर लेने का शौक भी तेजी से बढ़ रहा है। 75 लाख की आबादी वाले इस छोटे से पहाड़ी राज्य में 24,48,291 वाहन पंजीकृत होना अपने आप में चौंकाने वाला आंकड़ा है।
यानी औसतन हर तीसरे व्यक्ति के नाम एक वाहन दर्ज है। ऐसे में वाहन को अलग पहचान देने के लिए लोग अब विशेष और आकर्षक नंबरों पर खुलकर बोली लगा रहे हैं। लोगों में गाड़ियों को VIP नंबर लगवाने का क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी, 2023 से 23 फरवरी, 2026 तक फैंसी नंबरों की e-नीलामी से विभाग ने 80.82 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। पहले यह प्रक्रिया सीमित दायरे में होती थी, लेकिन अब पूरी तरह ई-ऑक्शन प्रणाली से पारदर्शी तरीके से नंबर आवंटित किए जा रहे हैं। इससे एक ओर जहां विभाग की आय बढ़ी है, वहीं लोगों को भी मनपसंद नंबर पाने का अवसर मिला है।
फैंसी नंबरों में सबसे अधिक मांग 0001 सीरीज की है। 10 नवंबर, 2023 को राज्य सरकार ने पहली बार 0001 नंबर को आम जनता के लिए e-नीलामी में रखा। इससे पहले यह नंबर केवल सरकारी वाहनों के लिए आरक्षित रहता था। नियमों में बदलाव के बाद अब यह नंबर भी आम लोग बोली लगाकर हासिल कर सकते हैं।
अब तक 47 वाहनों को 0001 नंबर आवंटित किया जा चुका है और केवल इसी सीरीज से 4.44 करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है। 0001 नंबर को लोग प्रतिष्ठा और पहचान का प्रतीक मान रहे हैं।
0001 सीरीज के कई नंबर ऊंची कीमत पर बिके हैं। इन उदाहरणों से साफ है कि वाहन मालिक विशेष नंबर के लिए मोटी रकम खर्च करने को तैयार हैं। जैसे कि-
VIP नंबरों की चर्चा तब और बढ़ गई थी जब HP99-9999 नंबर की बोली एक करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। उस समय फर्जीवाड़े की आशंका के चलते विभाग ने प्रक्रिया की समीक्षा की और e-ऑक्शन प्रणाली को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाया। इसके बाद से नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी सुधार किए गए।
डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री ने बताय कि परिवहन विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच विभाग ने कुल 2744.02 करोड़ रुपये की आय दर्ज की है- जो पूर्व सरकार के तीन वर्षों के 1564.76 करोड़ रुपये की तुलना में 1180 करोड़ रुपये अधिक है। यानी करीब 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि चालान प्रणाली में सुधार, e-सेवाओं का विस्तार, विशेष पंजीकरण नंबरों की e-नीलामी और कर संग्रह की बेहतर मॉनिटरिंग जैसे कदमों का सीधा असर राजस्व में वृद्धि के रूप में सामने आया है।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा तय मानकों पर बेहतर प्रदर्शन के चलते हिमाचल के परिवहन विभाग को 93 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है। यह राशि विभागीय सुधारों और तकनीकी उन्नयन में सहायक साबित होगी।
पहाड़ी राज्य में जहां एक समय वाहन केवल सुविधा का साधन माना जाता था, वहीं अब यह व्यक्तिगत पहचान और प्रतिष्ठा का प्रतीक भी बनता जा रहा है। लोग अपने व्यवसाय, जन्मतिथि, शुभ अंक या विशेष संयोजन के नंबर लेने के लिए खुलकर बोली लगा रहे हैं।
स्पष्ट है कि फैंसी नंबरों का यह बढ़ता चलन आने वाले समय में भी विभाग के लिए आय का मजबूत स्रोत बना रहेगा। साथ ही, e-नीलामी की पारदर्शी व्यवस्था से सरकार और आम नागरिक दोनों को फायदा हो रहा है।