सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कसौली विधानसभा क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक परिवार के लिए रात का खाना उस समय मुसीबत बन गया, जब भोजन करने के कुछ देर बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। देखते ही देखते दो बच्चों और एक महिला को उल्टियां शुरू हो गईं, जिससे पूरे परिवार में हड़कंप मच गया। 

सामान्य दिन की तरह बना था खाना, लेकिन कुछ ही देर में बिगड़ गई हालत

जानकारी के अनुसार यह घटना कसौली क्षेत्र की दूरगामी पंचायत पट्टा-महलोग के एखु गांव में पेश आई। परिवार ने रोज की तरह रात का भोजन तैयार किया था और सभी सदस्य खाना खाकर अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए। किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि खाने में कोई ऐसी चीज मौजूद है, जो उनकी सेहत के लिए खतरा बन सकती है।

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खाना खाने के कुछ समय बाद दो बच्चों और एक महिला को बेचैनी महसूस होने लगी। धीरे-धीरे उनकी हालत और खराब होने लगी तथा उन्हें लगातार उल्टियां आने लगीं। परिवार के अन्य सदस्य घबरा गए और कारण जानने की कोशिश करने लगे। जब समस्या बढ़ती गई तो परिजन उन्हें लेकर तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पट्टा पहुंचे।

खाने की जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

अस्पताल ले जाने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने घर में रखे बचे हुए खाने की जांच की। इसी दौरान उन्हें भिंडी की सब्जी में एक मरी हुई छिपकली दिखाई दी। यह देखकर सभी हैरान रह गए। परिवार का मानना है कि सब्जी बनाते समय अनजाने में छिपकली उसमें गिर गई होगी, जिसके कारण खाना दूषित हो गया और उसे खाने वाले सदस्यों की तबीयत खराब हो गई।

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घटना की जानकारी आसपास के लोगों तक पहुंची तो गांव में भी इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि खाना बनाते समय विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी चूक भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

अस्पताल पहुंचने पर शुरू हुआ उपचार

परिवार के सदस्य बीमार लोगों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टा पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की और आवश्यक दवाइयां तथा इंजेक्शन लगाए। उपचार के बाद मरीजों की हालत में सुधार देखा गया, लेकिन एहतियात के तौर पर उन्हें आगे की चिकित्सकीय जांच के लिए रेफर करने का फैसला लिया गया।

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परिवार के लोगों का कहना है कि समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण मरीजों को राहत मिल सकी। हालांकि इस दौरान उन्हें कुछ दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा।

अस्पताल में भी झेलनी पड़ी परेशानी

परिवार के लोगों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि रात के समय अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं और डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर मरीजों की हालत संभाल ली। फिलहाल सभी की तबीयत पहले से बेहतर बताई जा रही है।

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24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की मांग तेज

इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टा में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में हर समय चिकित्सक उपलब्ध होने चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके। स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्तमान समय में यहां तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेडिकल लीव पर हैं, जिसके कारण भी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। 

स्वास्थ्य विभाग ने की घटना की पुष्टि

खंड चिकित्सा अधिकारी चंडी डॉ. गुरमेल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि खाने में छिपकली मिलने के बाद दो बच्चों और एक महिला को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में उनका प्राथमिक उपचार किया गया और जरूरी इंजेक्शन लगाए गए।

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उन्होंने बताया कि मरीजों की स्थिति को देखते हुए एहतियातन उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच के लिए बद्दी रेफर किया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सभी मरीजों की हालत सामान्य और स्थिर है। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।