#विविध
July 5, 2026
सुक्खू सरकार को प्राथमिक शिक्षक फेडरेशन का अल्टिमेटम! करेंगे बड़ा आंदोलन- जानें कारण
'प्राथमिक शिक्षा बचाओ' अभियान का होगा आगाज
शेयर करें:

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम को लेकर प्राथमिक शिक्षकों का विरोध अब तेज होता जा रहा है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक फेडरेशन ने सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो यह विरोध लंबे समय तक जारी रहेगा।
दरअसल, प्राथमिक शिक्षक फेडरेशन का कहना है कि यह लड़ाई केवल शिक्षकों के हितों की नहीं, बल्कि प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के भविष्य को बचाने की है। फेडरेशन ने अपने आंदोलन को 'प्राथमिक शिक्षा बचाओ' नाम दिया है।
इसके तहत 11 जुलाई को मां बगलामुखी मंदिर से एक विशाल पदयात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से होकर 25 जुलाई को शिमला पहुंचेगी। इसके अगले दिन यानी 26 जुलाई को राजधानी के चौड़ा मैदान में प्रदेशभर से आने वाले हजारों शिक्षक सरकार के खिलाफ महाधरना देंगे।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि संगठन ने सरकार को 7 जुलाई तक का समय दिया है। यदि इस अवधि के भीतर सरकार ने शिक्षकों के साथ गंभीर और निर्णायक बातचीत नहीं की, तो संगठन भविष्य में किसी भी वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की ओर से शिक्षकों को भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में लागू की गई नीतियां उन आश्वासनों के विपरीत निकलीं। इससे शिक्षकों का सरकार पर विश्वास कमजोर हुआ है।
शिक्षक संगठन का कहना है कि नए कॉम्प्लेक्स सिस्टम के कारण प्राथमिक स्तर पर बच्चों की खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था बच्चों के समग्र विकास के बजाय केवल प्रशासनिक ढांचे को प्राथमिकता देती है।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) की भूमिका लगातार कमजोर की जा रही है। यदि ऐसा जारी रहा तो स्कूलों को मिलने वाली अनुदान राशि और स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्य भी प्रभावित होंगे।
फेडरेशन ने प्रदेश में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार इस समय प्राथमिक स्तर पर करीब 5,000 जेबीटी शिक्षकों के पद खाली हैं। इसके अलावा लगभग 3,000 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल संचालित हो रहा है।
ऐसे स्कूलों में यदि शिक्षक अवकाश पर चला जाए तो पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार को पहले खाली पद भरने और शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि नई व्यवस्थाएं लागू कर अतिरिक्त समस्याएं खड़ी की जाएं।
फेडरेशन ने सरकार से न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम की समीक्षा करने और प्राथमिक शिक्षकों से संवाद स्थापित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और व्यापक रूप ले सकता है।