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July 3, 2026

गगल एयरपोर्ट विस्तार: अभी ना जमीन खरीदी-ना मकान, प्रशासन ने दे दिए घर-भूमि खाली करने के नोटिस

कई लोगों के मुआवजे से जमीन तो खरीद लीए घर बनाने के पैसे नहीं बचे मचा हड़कंप

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kangra airport

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के बहुप्रतीक्षित गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में शामिल इस विस्तार कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। हालांकि परियोजना का अंतिम चरण अब सैकड़ों प्रभावित परिवारों की चिंता का कारण बनता जा रहा है। प्रशासन की ओर से भूमि खाली करने के नोटिस जारी होने के बाद शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में हड़कंप का माहौल है।

 

प्रभावित लोगों का कहना है कि एक तरफ प्रशासन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ कई परिवार अभी तक अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। कुछ लोगों ने नई जमीन खरीद ली है, लेकिन नए मकान नहीं बनवा पाए हैं, जबकि कई परिवार ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी तक नई जमीन का प्रबंध तक नहीं किया है।

 

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इन गांवों में लगाए गए भूमि खाली करने के नोटिस

प्रशासन ने शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महाल जुगेहड़, भड़ौत, रच्छियालू और कियोड़ियां गांवों में अर्जित भूमि पर बने मकानों, दुकानों, गोशालाओं और अन्य निर्माणों को खाली करने के नोटिस संबंधित परिवारों के घरों और भवनों पर चस्पा कर दिए हैं। नोटिस जारी होते ही प्रभावित गांवों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। लोग अपने भविष्य, पुनर्वास और रहने की व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

प्रशासन ने बताया पूरी हो चुकी है अधिग्रहण प्रक्रिया

प्रशासन का कहना है कि जिन जमीनों का अधिग्रहण किया गया है, उनकी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। पात्र और सहमत भू-स्वामियों को भूमि मुआवजा तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) से संबंधित देय राशि का भुगतान भी किया जा चुका है।

 

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इसके अलावा अधिग्रहित भूमि का स्वामित्व और कब्जा राजस्व रिकॉर्ड में पर्यटन विभाग, हिमाचल प्रदेश के नाम दर्ज किया जा चुका है तथा इंतकाल की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब परियोजना के लिए भूमि को पूरी तरह खाली करवाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।

ग्रामीण बोले—मुआवजे से जमीन तो खरीद ली, घर बनाने के पैसे नहीं बचे

प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता पुनर्वास को लेकर है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जो मुआवजा मिला, उसका अधिकांश हिस्सा नई जमीन खरीदने में खर्च हो गया। पिछले कुछ वर्षों में जमीनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते उन्हें नई जगह भूमि खरीदने के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन खरीदने के बाद अब उनके पास नया मकान बनाने के लिए पर्याप्त धन नहीं बचा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने तो और भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 

 

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कई परिवारों के सामने खड़ा हुआ आवास संकट

कुछ प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अभी तक नई जमीन भी नहीं खरीदी है। ऐसे में यदि उन्हें जल्द भूमि खाली करनी पड़ी तो उनके सामने रहने का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। नोटिस मिलने के बाद कई परिवार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं और अतिरिक्त समय या अन्य राहत की मांग कर रहे हैं। गांवों में लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वर्तमान घर छोड़ना पड़ा तो वे अपने परिवारों को लेकर कहां जाएंगे।

क्या कहा गया है नोटिस में?

प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि अधिग्रहित भूमि पर यदि किसी व्यक्ति का कब्जा है या वहां भवन निर्माण सामग्री, वाहन, पशुशाला, दुकान अथवा अन्य चल-अचल संपत्ति रखी हुई है तो उसे तत्काल हटाकर भूमि स्वेच्छा से खाली की जाए। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय के भीतर भूमि खाली नहीं करने की स्थिति में प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करेगा और आवश्यक होने पर कब्जा हटाने की प्रक्रिया स्वयं अमल में लाएगा।

 

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पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिए अहम है परियोजना

गगल एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को हिमाचल प्रदेश के विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े विमानों का संचालन संभव हो सकेगा, जिससे कांगड़ा, धर्मशाला, मैकलोडगंज, पालमपुर और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट विस्तार से पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। लेकिन दूसरी ओर प्रभावित परिवारों के लिए यह समय चिंता और अनिश्चितता का दौर बन गया है।

विकास और विस्थापन के बीच फंसे ग्रामीण

एक तरफ प्रदेश की बड़ी विकास परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है, तो दूसरी तरफ महाल जुगेहड़, भड़ौत, रच्छियालू और कियोड़ियां जैसे गांवों के कई परिवार भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। जमीन खाली करने के नोटिसों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। अब सबकी नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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