#विविध
July 5, 2026
हिमाचल : नौकरी गई तो खेती को बनाया करियर, युवा बालकृष्ण ने स्ट्रॉबेरी से लिखी सफलता की नई कहानी
बिचौलियों से दूरी, सीधे ग्राहकों तक पहुंच
शेयर करें:

मंडी। कोरोना महामारी ने जहां लाखों लोगों की रोजी-रोटी छीन ली, वहीं कुछ लोगों ने मुश्किल हालात को ही अपनी सफलता का रास्ता बना लिया। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के करसोग क्षेत्र के युवा किसान बालकृष्ण ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया। निजी कंपनी की नौकरी छूटने के बाद उन्होंने मायूस होने की बजाय अपने गांव लौटकर आधुनिक खेती को अपनाया और आज स्ट्रॉबेरी उत्पादन के जरिए अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
दरअसल, करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सोमाकोठी निवासी बालकृष्ण ने अपनी करीब एक बीघा भूमि पर आधुनिक तरीके से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की।
शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन गुणवत्ता और मेहनत के दम पर उनकी फसल ने स्थानीय बाजार में अलग पहचान बना ली। बेहतर उत्पादन और स्वाद के कारण उनकी स्ट्रॉबेरी की मांग लगातार बढ़ रही है।
बालकृष्ण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहते। वे स्वयं अपनी कार से स्ट्रॉबेरी लेकर बाजार पहुंचते हैं और सीधे ग्राहकों को बेचते हैं। इससे उन्हें उचित कीमत मिलती है और मुनाफा भी अधिक होता है। इस मॉडल ने उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वर्तमान समय में उनकी स्ट्रॉबेरी स्थानीय बाजार में 300 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। इसी वजह से मात्र एक बीघा भूमि से उन्हें हर महीने लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
खेती के इस कार्य में उनके परिवार के सदस्य भी पूरा सहयोग करते हैं, जिससे यह व्यवसाय पूरे परिवार के लिए स्थायी आय का साधन बन गया है।
बालकृष्ण केवल अपनी खेती तक सीमित नहीं रहना चाहते। उन्होंने स्ट्रॉबेरी के लगभग दो लाख पौधों की नर्सरी तैयार की है। उनकी योजना है कि करीब एक लाख पौधे अपने खेतों में लगाए जाएं, जबकि शेष पौधे दूसरे किसानों को उपलब्ध कराए जाएं ताकि क्षेत्र में अधिक से अधिक लोग इस लाभकारी खेती से जुड़ सकें।
स्ट्रॉबेरी की सफलता के बाद अब बालकृष्ण उच्च मूल्य वाली अन्य फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं। वे आने वाले समय में ब्लूबेरी, खुबानी और प्लम जैसी फलों की खेती का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और बाजार की सही समझ के साथ पहाड़ों की खेती को भी लाभकारी बनाया जा सकता है।
बालकृष्ण की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि मेहनत, नई सोच और सही योजना के साथ खेती की जाए तो सीमित भूमि से भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। प्रदेश सरकार की कृषि और बागवानी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपनी पहचान एक सफल किसान के रूप में बनाई है। आज वे उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो नौकरी के बजाय स्वरोजगार और आधुनिक खेती को अपनाना चाहते हैं।