शिमला। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से उपजे सियासी घमासान और आर्थिक दबावों के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल को बड़ी राहत प्रदान की है। वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहे पहाड़ी राज्य को केंद्र की मोदी सरकार ने करोड़ों रुपये की विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की है। इससे आधारभूत ढांचे और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जगी है।
दो चरणों में मिली आर्थिक मदद
केंद्र सरकार ने पूंजीगत निवेश सहायता योजना के तहत हिमाचल को कुल लगभग 286 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें एक भाग के रूप में करीब 27 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई है, जो सड़कों, पुलों, भवनों और अन्य आधारभूत परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए निर्धारित है। इसके अतिरिक्त लगभग 259 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और ढांचे को मजबूत करने के लिए दी गई है। प्रदेश में हाल के वर्षों में आई आपदाओं के बाद यह सहायता विशेष महत्व रखती है।
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सख्त शर्तों के साथ मिली राहत
हालांकि यह आर्थिक मदद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि जारी राशि दस कार्य दिवसों के भीतर संबंधित एजेंसियों को हस्तांतरित करनी होगी। 31 मार्च 2026 तक पूरी राशि का उपयोग अनिवार्य होगा, अन्यथा समायोजन या वापसी की स्थिति बन सकती है।
सिर्फ खाते में धनराशि रखे रहने को व्यय नहीं माना जाएगा। परियोजनाओं में किसी भी बदलाव के लिए केंद्र की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। यदि दोहरी फंडिंग पाई गई तो भविष्य की केंद्रीय हिस्सेदारी से कटौती की जा सकती है। समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करने पर अगली किस्त भी रोकी जा सकती है।
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आरडीजी बंद होने से बढ़ी थी चिंता
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई थी। यह अनुदान पहले राजस्व और व्यय के अंतर को संतुलित करने में मदद करता था। इसके बंद होने से कर्मचारियों के वेतन] पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। ऐसे समय में केंद्र से मिली यह सहायता राज्य सरकार के लिए राहत का संदेश लेकर आई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक वित्तीय संतुलन के लिए राज्य को अपने संसाधन बढ़ाने और व्यय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे।
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विकास की रफ्तार पर टिकी नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य सरकार इस सहायता राशि को कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ जमीनी विकास में बदल पाती है। समयबद्ध खर्च, स्पष्ट लेखा-जोखा और प्रभावी क्रियान्वयन ही इस मदद को वास्तविक राहत में बदल पाएगा। आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में केंद्र से मिली सहायता ने हिमाचल को फिलहाल राहत की सांस दी है, लेकिन आगे की राह अनुशासन और दक्ष वित्तीय प्रबंधन से ही आसान हो सकेगी।
