#राजनीति
February 20, 2026
जयराम सरकार ने जनता के पैसे से खड़े किए थे "महल", केंद्र ने लोगों की प्यास बुझाने को भेजा था पैसा
बजट सत्र में डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने उजागर किए तथ्य
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पूर्ववर्ती जयराम सरकार के कार्यकाल के दौरान एक ऐसा वित्तीय हेरफेर सामने आया है जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। केंद्र सरकार की अति-महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना जिसका मूल उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना था] उसके बजट को कथित रूप से अपने चहेते क्षेत्रों में आलीशान विश्राम गृह बनाने के लिए डाइवर्ट कर दिया गया। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री द्वारा विधानसभा में साझा किए गए तथ्य सीधे तौर पर जयराम सरकार की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक शुचिता पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।
विधानसभा में हुए खुलासे के अनुसार पूर्ववर्ती सरकार के दौरान नियमों को ताक पर रखकर लगभग 37.85 करोड़ रुपये केवल दो विधानसभा क्षेत्रों धर्मपुर और सराज में खर्च कर दिए गए। पूर्व जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के गृह क्षेत्र धर्मपुर में 12 और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के निर्वाचन क्षेत्र सराज में 7 विश्राम गृहों का निर्माण किया गया। आरोप है कि यह जनता के धन का घोर दुरुपयोग है, जहां मिशन का पैसा पाइप बिछाने और पानी पहुंचाने के बजाय कंक्रीट के ढांचे खड़े करने में झोंक दिया गया।
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इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू यह है कि केंद्र सरकार की आंखों में धूल झोंकने के लिए इन निर्माणों को 'निरीक्षण कुटीर' (इंस्पेक्शन हट्स) और 'किसान भवन' जैसे नाम दिए गए। जल जीवन मिशन की नियमावली में विश्राम गृह बनाने का कोई प्रावधान नहीं था, फिर भी सत्ता के रसूख का उपयोग कर बजट को इन अनावश्यक निर्माणों की ओर मोड़ दिया गया। यह न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि उन हजारों परिवारों के साथ विश्वासघात भी है जो आज भी स्वच्छ जल की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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जयराम सरकार के इस कथित भ्रष्टाचार और बजट के दुरुपयोग का परिणाम अब प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने इन निर्माणों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बजट जारी करने से इनकार कर दिया है और स्पष्ट किया है कि यह 37.85 करोड़ रुपये अब राज्य सरकार को अपने सीमित संसाधनों से भरने होंगे। केंद्र की इस 'लाल झंडी' ने जयराम सरकार के दावों की पोल खोल दी है और वर्तमान सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ खड़ा कर दिया है।
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पूर्ववर्ती सरकार के समय हुए इन कुप्रबंधों के कारण अब केंद्र ने बजट जारी करने के बदले कड़ी शर्तें थोप दी हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण 'निःशुल्क जल' योजना पर रोक लगाने और सामान्य परिवारों से 100 रुपये व निम्न आय वर्ग से 30 रुपये मासिक बिल वसूलने का दबाव शामिल है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि पूर्व सरकार की मनमानी और वित्तीय भटकाव के कारण आज हिमाचल की आम जनता को आर्थिक चोट पहुँचने की नौबत आ गई है।
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वर्तमान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के बयानों से यह साफ है कि आने वाले समय में जलशक्ति विभाग में किसी भी विश्राम गृह का निर्माण बिना कैबिनेट की मंजूरी के नहीं होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की 'बजट चोरी' न हो सके। विपक्ष में बैठी भाजपा और विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अब इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कटघरे में हैं, क्योंकि यह मामला केवल विकास का नहीं बल्कि 'मिशन' की पवित्रता और सार्वजनिक धन के अनैतिक इस्तेमाल का बन गया है।