सिरमौर। हिमाचल के तीन दोस्तों ने रामपुर में जब एक स्टेडियम बनाया था- तब वो पूरे देश में वायरल हुआ। अब हिमाचल का ये दूसरा क्रिकेट स्टेडियम पूरे देश में वायरल हो रहा है। जिसे 60 युवक और युवतियों ने बनाया, सहेजा और संभाला है।

हिमाचल का क्रिकेट स्टेडियम वायरल

ये 60 के 60 युवक-युवतियां किसी भी तरह का नशा नहीं करते हैं। ना बीड़ी- ना सिगरेट और ना ही शराब पीते हैं। क्योंकि इन्हें पहले से ही खेल की लत लगी हुई है। हम बात कर रहे हैं जिला सिरमौर के चांदनी गांव में बने खूबसूरत से स्टेडियम और इस चलाने वाले सूर्य नवयुवक मंडल की।

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चांदनी गांव का शानदार स्टेडियम

गिरी नदी के किनारे बसा ये चांदनी गांव है- करीब 300 लोगों की आबादी वाले इस गांव में युवाओं ने मिलकर जो कर दिखाया है, वह अपने आप में मिसाल है। सूर्य नवयुवक मंडल की शुरुआत साल 1990 में हुई थी। आज इस मंडल से करीब 60 युवा शक्ति जुड़े हुए हैं और पिछले 15 वर्षों से यशपाल ठाकुर इसके अध्यक्ष हैं।

 

नशे से बनाकर रखी दूरी

इन युवाओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्होंने नशे से दूरी बनाकर रखी है। जिस जगह पर ये स्टेडियम बना है - गिरी नदी के किनारे का यह स्थान पहले सिर्फ पशु चराने का मैदान हुआ करती थी। लेकिन युवाओं ने सोचा कि जब दूसरे गांवों में क्रिकेट टूर्नामेंट होते हैं, तो हमारे गांव में क्यों नहीं।

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सरकार से नहीं एक रुपया

युवाओं ने अपने दम पर यहां एक शानदार क्रिकेट ग्राउंड तैयार कर दिया। इसमें सरकार का एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। यह मैदान पूरी तरह युवाओं की मेहनत और गांव के लोगों के सहयोग से तैयार हुआ है।

बाग ग्राउंड नाम से मशहूर स्टेडियम

आज यह मैदान BGC यानी बाग ग्राउंड चांदनी के नाम से जाना जाता है। बरसात में मैदान सुरक्षित रहे, इसके लिए युवाओं ने खुद बाउंड्री भी बनाई और पूरा रखरखाव भी अपने दम पर करते हैं।

 

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क्रिकेट के 7 सीजन पूरे

नशा छोड़ो अभियान के तहत यहां क्रिकेट के 7 सीजन पूरे हो चुके हैं और हर साल आसपास के गांवों की टीमें यहां खेलने आती हैं। सूर्य नवयुवक मंडल सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है।

खेलने आती हैं कई गांव की टीमें

गांव में हर साल रामलीला का आयोजन भी यही युवक और युवतियां करते हैं। रामलीला से जो फंड जुटता है - करीब 1 से 2 लाख रुपये - उसी से खेल गतिविधियां और सामाजिक काम चलाए जाते हैं।

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जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे

अगर गांव में किसी गरीब परिवार को अचानक मदद की जरूरत पड़े, तो यह मंडल तुरंत आगे आता है और जरूरत पड़ने पर 5 हजार रूपए की फौरी आर्थिक सहायता भी देता है। यानी चांदनी गांव के ये युवा सिर्फ एक मैदान नहीं बना रहे, बल्कि एक बेहतर समाज भी बना रहे हैं।

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